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Author: Dialogue India

विश्व पर्यावास दिवस 2022 ‘माइंड द गैप’ लीव नो वन बिहाइंड एंड नो प्लेस बिहाइंड’ के विषय के साथ मनाया गया

विश्व पर्यावास दिवस 2022 ‘माइंड द गैप’ लीव नो वन बिहाइंड एंड नो प्लेस बिहाइंड’ के विषय के साथ मनाया गया

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विश्व पर्यावास दिवस 2022 मनाने के लिए आज आयोजित एक कार्यक्रम में आवास और शहरी कार्य और पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप एस पुरी ने मुख्य भाषण दिया। श्री पुरी ने कहा कि यह विषय एक ऐसे मजबूत अनुस्मारक के रूप में कार्य करता है जिसमें हम किसी भी नागरिक और किसी जगह को पीछे नहीं छोड़ सकते हैं, क्योंकि हम एक अधिक लचीले भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में विश्व पर्यावास दिवस 2022 मनाया। आवास और शहरी कार्य और पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी, आवास और शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री कौशल किशोर, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव और श्री शोम्बी शार्प, यूएन रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर, यूएन-हैबिटेट श्री मनोज जोशी सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। सभा को संबोधित करते हु...
रासायनिक उर्वरकों को कम करें, धरती के घाव भरें

रासायनिक उर्वरकों को कम करें, धरती के घाव भरें

TOP STORIES, विश्लेषण
रासायनिक उर्वरकों को कम करें, धरती के घाव भरें कीटनाशकों को सब्जी पर लगाया जाता है जो सीधे मानव या पशुओं के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग भूमिगत जल को नाइट्रेट से प्रदूषित कर सकता है और यह मनुष्यों या पशुओं के लिए बहुत खतरनाक है। नाइट्रेट केंद्रित पानी रक्त में कुछ हीमोग्लोबिन को स्थिर कर सकता है। संतुलित उपयोग पानी की कम खपत को भी प्रतिबिंबित करेगा, साथ ही साथ जल निकायों को अपवाह प्रदूषण से बचाएगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कृषि विज्ञान केंद्रों के नेटवर्क के अलावा कृषि, सहयोग और किसान कल्याण और उर्वरक विभागों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से संतुलित उर्वरक के बारे में किसान जागरूकता को बढ़ाया जाना चाहिए। सिक्किम राज्य द्वारा दिखाए गए अनुसार प्राथमिकताओं और सब्सिडी को रासायनिक से जैविक खेती में बदलना समय की मांग है।-डॉ सत्यवान सौरभकीटों और रोगों ने मौजूदा...
कवि वास्तविक दुनिया का आईना रखते हैं।

कवि वास्तविक दुनिया का आईना रखते हैं।

साहित्य संवाद
कवि वास्तविक दुनिया का आईना रखते हैं। कविता एक राजनीतिक कार्य है क्योंकि इसमें सच बोलना शामिल है। कवियों की अभिव्यक्ति दुनिया की सच्चाई को आवाज देती है।  कवि कानून स्थापित कर सकते हैं और ज्ञान के लिए नई सामग्री बना सकते हैं, कवियों की विधायक के रूप में भूमिका निर्धारित कर सकते हैं। अपने सजीव विचारों से वह वातावरण बनाता है । बाइबल के भजनों ने सदियों से ईसाइयों के जीवन को आकार दिया है।  भगवान कृष्ण कवि बने और उनकी गीता काव्य में है। गीता और बाइबल अनगिनत लाखों लोगों के आचरण को इस तरह से मार्गदर्शन करने के लिए एक प्रकाशस्तंभ रहे हैं। इन नैतिक मूल्यों का प्रसार वे लोग करते हैं जो धर्म में भी विश्वास नहीं करते हैं। -प्रियंका सौरभ फ्रांसीसी कवि जीन कोक्ट्यू बताते हैं कि "कवि आविष्कार नहीं करता है वह सुनता है"। कव...
अंग्रेजों के अत्याचारों पर ये खामोशी क्यों ?

अंग्रेजों के अत्याचारों पर ये खामोशी क्यों ?

EXCLUSIVE NEWS, विश्लेषण
अंग्रेजों के अत्याचारों पर ये खामोशी क्यों ? विनीत नारायण पिछले कुछ वर्षों से मुसलमानों को लेकर दुनिया के तमाम देशों में चिंता काफ़ी बढ़ गई है। हर देश अपने तरीक़े से मुसलमानों की धर्मांधता से निपटने के तरीक़े अपना रहा है। खबरों के मुताबिक़ चीन इस मामले में बहुत आगे बढ़ गया है। वैसे भी साम्यवादी देश होने के कारण चीन की सरकार धर्म को हेय दृष्टि से देखती है। पर मुसलमानों के प्रति उसका रवैया कुछ ज़्यादा ही कड़ा और आक्रामक है। इसी तरह यूरोप के देश जैसे फ़्रांस, जर्मनी, हॉलैंड और इटली भी मुसलमानों के कट्टरपंथी रवैए के विरुद्ध कड़ा रुख़ अपना रहे हैं। इधर भारत में मुसलमानों को लेकर कुछ ज़्यादा ही आक्रामक तेवर अपनाए जा रहे हैं। इस विषय पर मैंने पहले भी कई बार लिखा है। मैं अपने सनातन धर्म के प्रति आस्थावान हूँ। पर यह भी मानता हूँ कि धर्मांधता और कट्टरपंथी रवैया, चाहे किसी भी धर्म का हो, पूर...
राष्ट्रपति ने 68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किए

राष्ट्रपति ने 68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किए

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राष्ट्रपति ने 68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किए राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने आज (30 सितंबर, 2022) नई दिल्ली में विभिन्न श्रेणियों में 68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने सुश्री आशा पारेख को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने 68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी। उन्होंने सुश्री आशा पारेख को दादा साहब फाल्के पुरस्कार जीतने पर बधाई दी और कहा कि उस पीढ़ी की हमारी बहनों ने कई बाधाओं के बावजूद विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है। सुश्री पारेख का सम्मान भी अदम्य नारी शक्ति का सम्मान है। राष्ट्रपति ने कहा कि फिल्म उद्योग के अलावा फिल्म उद्योग एक बेहतर समाज और राष्ट्र के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाता है। श्रव्य-दृश्य माध्यम होने के कारण फिल्मों का प्रभाव कला के अन्य माध्यमों की तुल...
कांग्रेसः फिर चक्का जाम

कांग्रेसः फिर चक्का जाम

BREAKING NEWS, राष्ट्रीय
*कांग्रेसः फिर चक्का जाम* *डॉ. वेदप्रताप वैदिक* मल्लिकार्जुन खड़गे अब कांग्रेस के अध्यक्ष बनेंगे, यह तो तय ही है। यदि अशोक गहलोत बन जाते तो कुछ कहा नहीं जा सकता था कि कांग्रेस का क्या होता? गहलोत को राजस्थान के कांग्रेसी विधायकों के प्रचंड समर्थन ने महानायक का रूप दे दिया था लेकिन गहलोत भी गजब के चतुर नेता हैं, जिन्होंने दिल्ली आकर सोनिया गांधी का गुस्सा ठंडा कर दिया। उन्हें अध्यक्ष की खाई में कूदने से तो मुक्ति मिली ही, उनका मुख्यमंत्री पद अभी तक तो बरकरार ही लग रहा है। अध्यक्ष बनने के बाद खड़गे की भी हिम्मत नहीं पड़ेगी कि वे गहलोत पर हाथ डालें। गहलोत और कांग्रेस के कई असंतुष्ट नेता भी उम्मीदवारी का फार्म भरनेवाले खड़गे के साथ-साथ पहुंच गए। याने समस्त संतुष्ट और असंतुष्ट नेताओं ने अपनी स्वामिभक्ति प्रदर्शित करने में कोई संकोच नहीं किया। यह ठीक है कि शशि थरुर और त्रिपाठी ने भी अध्यक्ष के...
मोदी सरकार : सराहनीय आक्रामकता – अनुज अग्रवाल

मोदी सरकार : सराहनीय आक्रामकता – अनुज अग्रवाल

BREAKING NEWS, Current Affaires, EXCLUSIVE NEWS, समाचार
मोदी सरकार : सराहनीय आक्रामकता - अनुज अग्रवाल मोदी सरकार अत्यंत ही आक्रामक मोड में है। कोविड के झटकों से उभरकर अब सरकार ने वही रूप अपना लिया है जिस कारण जनता मोदी जी को पसंद करती है। तीव्र किंतु संतुलित विकास, तेज़ी से निर्णय लेने वाली सरकार , निर्णयों के अनुपालन की निरंतर निगरानी, राष्ट्रविरोधी व कट्टरपंथियों ताक़तों के विरुद्ध सख्त व निर्णायक कार्यवाही, भ्रष्टाचार , कालाधन, चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी, कर चोरी व मादक पदार्थों के विरुद्ध सख़्त कार्यवाही, नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने की पहल, विकेन्द्रित विकास के साथ कृषि, पशुपालन, दुग्ध, चाय, मछली,बागवानी, सी फूड आदि उत्पादन, प्रभावी ढांचागत व आर्थिक विकास , स्वतंत्र व प्रभावी रक्षा व विदेश नीति अब मोदी सरकार की पहचान बन गए हैं। मोदी सरकार के देश हित में ताबड़तोड़, आक्रामक व निर्णायक कदमों से आम जनता के मनोबल में जबरदस्त वृद्धि हुई है। ...
अनचाहे गर्भ से कानूनी छुटकारा, क्या बदलेगी तस्वीर?

अनचाहे गर्भ से कानूनी छुटकारा, क्या बदलेगी तस्वीर?

TOP STORIES, सामाजिक
अनचाहे गर्भ से कानूनी छुटकारा, क्या बदलेगी तस्वीर? एक ऐसे समाज में जो अत्यधिक पितृसत्तात्मक है, महिलाओं को गर्भपात तक पहुंचना मुश्किल लगता है। स्वास्थ्य सेवा के लिए अक्सर महिलाओं से अपने पति, या परिवार के सदस्यों की अनुमति लेने के लिए कहते हैं, भले ही यह कानून द्वारा आवश्यक न हो।  परिवार हो या अस्पताल हर जगह महिलाओं की अबॉर्शन के मामले में मोरल पुलिसिंग की जाती है और यही वजह है कि असुरक्षित अबॉर्शन के कारण देश में आये दिन हजारों महिलाओं की जान चली जाती है।  अक्सर, महिला की गोपनीयता और गोपनीयता की रक्षा नहीं की जाती है। यौनकर्मी, एचआईवी पॉजिटिव महिलाएं, आदिवासी महिलाएं, एकल महिलाएं और युवाओं के लिए गर्भपात तक पहुंचना और भी मुश्किल हो जाता है। और पहुंच की कमी असुरक्षित गर्भपात की ओर ले जाती है। नए कानून से शायद अब ऐसा न हो। - प्रियंका सौरभ प्रजनन अधिकारों पर एक महत्व...
भारतीय पर्यटन उद्योग में आ रही है रोजगार के नए अवसरों की बहार

भारतीय पर्यटन उद्योग में आ रही है रोजगार के नए अवसरों की बहार

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भारतीय पर्यटन उद्योग में आ रही है रोजगार के नए अवसरों की बहार अभी हाल ही में जारी की गई सीधी नियुक्ति मंच हायरेक्ट की 'जॉब इंडेक्स रिपोर्ट' के अनुसार, जून 2022 से अगस्त 2022 के तीन महीनों के दौरान टूर एंड ट्रेवल उद्योग में नए रोजगार के अवसरों में जोरदार तेजी देखी गई है, जो भारत के लिए रोजगार की दृष्टि से बहुत अच्छा संकेत माना जा सकता है। दरअसल कोविड महामारी के दौर का असर कम होने के बाद अन्य उद्योगों के साथ ही पर्यटन उद्योग भी अब तेजी से वापिस पटरी पर आ गया है। भारत में वित्त वर्ष 2022-23 के जून-अगस्त 2022 की अवधि के दौरान यात्रा और पर्यटन उद्योग में रोजगार के नए अवसरों में 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। मासिक आधार पर रोजगार के नए अवसरों में 8 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज हुई है। यह सब केंद्र सरकार द्वारा पर्यटन उद्योग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से समय समय पर ...
बुजुर्ग हमारे वजूद है न कि बोझ

बुजुर्ग हमारे वजूद है न कि बोझ

विश्लेषण
बुजुर्ग हमारे वजूद है न कि बोझ (बदलते परिवेश में एकल परिवार बुजुर्गों को घर  की  दहलीज से दूर कर रहें है. बच्चों को दादी- नानी  की  कहानी की बजाय पबजी अच्छा लगने लगा है, बुजुर्ग अपने बच्चों से बातों को तरस गए है. वो  घर के किसी कोने में अकेलेपन का शिकार हो रहें है. ऐसे में इनकी मानसिक-आर्थिक-सामाजिक समस्याएं बढ़ती जा रही है. महँगाई  के आगे पेंशन कम होती जा रही है. आयुष्मान योजना में बुजुर्गों को शामिल कर उनके स्वास्थ्य देखभाल के साथ बुजर्गों के लिए अलग से योजनाएं लाने की सख्त जरूरत है.) हमारे देश में बुजुर्ग तेजी से बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन उनके लिए उपलब्ध संसाधन कम होते जा रहें  हैं। ऐसे में हम सबकी जिम्मेवारी बनती है कि उन्हें  एक तरफ रखने के बजाय उनकी  शारीरिक और मानसिक देखभाल करने के लिए समुदायों के जीवन में एकीकृत किया जाना चाहिए, जहां वे सामाजिक परिस्थितियों को सुधारने में पर...