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Author: Dialouge India

डिजिटल-क्रांति से ही नकली नोटों पर नियंत्रण संभव

डिजिटल-क्रांति से ही नकली नोटों पर नियंत्रण संभव

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डिजिटल-क्रांति से ही नकली नोटों पर नियंत्रण संभव-ललित गर्ग- भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा हाल ही में जारी एक चौंकाने वाली रिपोर्ट ने न केवल अर्थव्यवस्था को, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा और नागरिकों की जागरूकता को भी झकझोर कर रख दिया है। आरबीआई के गवर्नर द्वारा संसदीय समिति में प्रस्तुत एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में 500 रूपये के लगभग 1.8 लाख नोट नकली पाए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 37 प्रतिशत अधिक हैं। यह संख्या किसी सामान्य अपराध की नहीं, बल्कि राष्ट्र के विरुद्ध एक षड्यंत्र की कहानी कहती है। जो यह दर्शाता है कि कालाबाजारी करने वाले राष्ट्र विरोधी तत्व देश में मुद्रा की मांग का गलत फायदा उठा रहे हैं। विडंबना यह है कि राजस्व खुफिया निदेशालय द्वारा नोट में इस्तेमाल होने वाले आयातित कागज और नकली नोट छापने में शामिल ऑपरेटरों पर लगातार कार्रवाई के बावजूद यह गंभीर समस्या बनी हु...
 “रेखा गुप्ता का सियासी सफर: दिल्ली की सत्ता में बदलाव की दस्तावेज़ी कहानी”

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 "रेखा गुप्ता का सियासी सफर: दिल्ली की सत्ता में बदलाव की दस्तावेज़ी कहानी" 2025 के चुनावों के बहाने भारतीय लोकतंत्र, नेतृत्व और नारी शक्ति के उत्कर्ष की विश्लेषणात्मक प्रस्तुति लेखक: गोपाल शर्मा समीक्षक : उमेश कुमार सिंह  "दिल्ली 2025: रेखा गुप्ता का सियासी सफर" एक राजनीतिक यात्रा का ऐसा लेखबद्ध दस्तावेज़ है जो महज घटनाओं की श्रृंखला नहीं, बल्कि उन घटनाओं के पीछे की मानसिकता, रणनीति और नेतृत्व दृष्टिकोण को भी उजागर करता है। यह पुस्तक भारत की राजधानी दिल्ली के 2025 के ऐतिहासिक चुनावों के बहाने भारतीय लोकतंत्र के चरित्र, मतदाता की परिपक्वता और नेतृत्व परिवर्तन की जटिल प्रक्रियाओं की पड़ताल करती है। लेखक गोपाल शर्मा, जिन्होंने शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में वर्षों तक अपना योगदान दिया है, इस राजनीतिक यात्रा को एक अनुभवी साहित्यकार और गहन ...
चातुर्मास है अध्यात्म की फसल उगाने का अवसर

चातुर्मास है अध्यात्म की फसल उगाने का अवसर

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चातुर्मास शुभारंभ-06 जुलाई 2025 पर विशेषचातुर्मास है अध्यात्म की फसल उगाने का अवसर- मंत्र महर्षि डॉ. योगभूषण महाराज - सृष्टि का चक्र अनवरत गतिशील है-गर्मी, वर्षा और शीत ऋतु इसका पर्याय हैं। इन्हीं ऋतुओं में से एक वर्षा ऋतु-न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से, बल्कि आध्यात्मिक और धार्मिक जगत के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जैन धर्म में इस अवधि को “चातुर्मास” या “वर्षायोग” कहा जाता है, जैन परम्परा में आषाढ़ी पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक का समय तथा वैदिक परम्परा में आषाढ़ से आसोज तक का समय चातुर्मास कहलाता है। इस दौरान दिगम्बर और श्वेताम्बर दोनों परंपराओं के मुनि स्थिर एक ही स्थान पर विराजमान रहते हैं। यह नियम प्राकृतिक कारणों से भी जुड़ा है-जैसे वर्षा ऋतु में जीव-जंतु अधिक उत्पन्न होते हैं, जिससे भ्रमण करने से अहिंसा का उल्लंघन हो सकता है। वास्तव में आज के व्यस्त, तनाव एवं हिंसाग्रस्त और भौति...
कथावाचक कांड की आड़ में -सनातन पर हमला

कथावाचक कांड की आड़ में -सनातन पर हमला

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कथावाचक कांड की आड़ में -सनातन पर हमलामृत्युंजय दीक्षितइटावा के कथावाचक काण्ड को राजनीतिक रंग देकर उसमें स्वयं फंसते नजर आ रहे सपा मुखिया अखिलेश यादव ने बाबा बागेश्वर धाम आचार्य धीरेंद्र शास्त्ऱी पर ही हमला बोल दिया और उन पर कथा करने के लिए अंडर द टेबल 50 लाख रुपए लेने का आरोप लगाकर नया विवाद उत्पन्न करने का असफल प्रयास किया है। सपा मुखिया जब इटावा की घटना पर भारतीय जनता पार्टी को घेरने में सफल नहीं हुए तब उन्होंने हिंदू राष्ट्र का नारा देने वाले धीरेंद्र शास्त्ऱी जी पर बयान देकर सनसनी मचाने का प्रयास किया। वास्तव में अखिलेश यादव धीरेन्द्र शास्त्ऱी जी की आड़ में अपनी पीडीए राजनीति को हवा देने का प्रयास कर रहे हैं।सपा मुखिया अखिलेश यादव यह बात अच्छी तरह से जानते हैं कि वर्तमान समय में बाबा बागेश्वर धाम की लोकप्रियता चरम सीमा पर है। बाबा बागेश्वर के लाखों भक्त तथा प्रशंसक हैं, वे जहां भी कथ...
अखिलेश की बदलती राजनीति,सावन में काशी से हिंदुत्व का दांव

अखिलेश की बदलती राजनीति,सावन में काशी से हिंदुत्व का दांव

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अखिलेश की बदलती राजनीति,सावन में काशी से हिंदुत्व का दांव संजय सक्सेना,वरिष्ठ पत्रकार2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव हर हाल में सत्ता में वापसी की जुगत में जुटे हैं। उत्तर प्रदेश की सियासत में सपा का आधार लंबे समय तक मुलायम सिंह यादव द्वारा स्थापित मुस्लिम-यादव (एम-वाई) समीकरण रहा है। इस समीकरण के सहारे मुलायम सिंह तीन बार और अखिलेश यादव एक बार मुख्यमंत्री बनने में सफल रहे। लेकिन 2014 के बाद से उत्तर प्रदेश की राजनीति में आए बदलाव ने सपा के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने हिंदुत्व की छतरी तले विभिन्न हिंदू जातियों को एकजुट करने में सफलता हासिल की है, जिसने सपा की परंपरागत रणनीति को कमजोर कर दिया है। अखिलेश यादव अब इस बदले सियासी परिदृश्य में अपनी पार्टी की छवि को नया रूप देने और व्यापक स...
हिन्दी को संघर्ष का नहीं, सेतु का माध्यम बनायें

हिन्दी को संघर्ष का नहीं, सेतु का माध्यम बनायें

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हिन्दी को संघर्ष का नहीं, सेतु का माध्यम बनायें  ललित गर्ग  दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में हिन्दी विरोध की राजनीति अब महाराष्ट्र में भी उग्र से उग्रत्तर हो गयी, इसी के कारण त्रिभाषा नीति को महाराष्ट्र में लगा झटका दुखद और अफसोसजनक है। आखिरकार राजनीतिक दबाव, लंबी रस्साकशी और कशमकश के बाद महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने स्कूलों में हिंदी की पढ़ाई से जुड़े मुद्दे पर यू-टर्न लेते हुए अपने कदम पीछे खींच लिए। विदित हो कि केंद्र सरकार की नीति के तहत महाराष्ट्र के स्कूलों में पहली कक्षा से हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाना था। राजनीतिक आग्रहों एवं दुराग्रहों के चलते अब ऐसा नहीं हो पाएगा। मतलब, महाराष्ट्र को तीसरी भाषा के रूप में भी हिंदी मंजूर नहीं है। महाराष्ट्र में हिंदी का संकट वास्तव में एक गहरे सामाजिक-राजनीतिक विमर्श का हिस्सा है। यह केवल भाषाई नहीं, बल्कि अस्म...
मध्यम वर्गीय परिवार नहीं फंसे ऋण के जाल में

मध्यम वर्गीय परिवार नहीं फंसे ऋण के जाल में

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मध्यम वर्गीय परिवार नहीं फंसे ऋण के जाल में हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो दर में 50 आधार बिंदुओं की कमी की है। इसके साथ ही, निजी क्षेत्र के बैंकों, सरकारी क्षेत्र के बैंकों एवं क्रेडिट कार्ड कम्पनियों सहित अन्य वित्तीय संस्थानों ने भी अपने ग्राहकों को प्रदान की जा रही ऋणराशि पर लागू ब्याज दरों में कमी की घोषणा करना प्रारम्भ कर दिया है ताकि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में की गई कमी का लाभ शीघ्र ही भारत मे...
महिला आरक्षण की दहलीज़ पर लोकतंत्र: अब दलों को जिम्मेदारी उठानी होगी

महिला आरक्षण की दहलीज़ पर लोकतंत्र: अब दलों को जिम्मेदारी उठानी होगी

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महिला आरक्षण की दहलीज़ पर लोकतंत्र: अब दलों को जिम्मेदारी उठानी होगी 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत में राजनीति के स्वरूप को बदलने का ऐतिहासिक अवसर है। हालांकि इसका क्रियान्वयन 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले संभव है, लेकिन यह तभी सफल होगा जब राजनीतिक दल अभी से महिलाओं के लिए अनुकूल वातावरण बनाएँ। केवल आरक्षित सीटें देना पर्याप्त नहीं; दलों को आंतरिक कोटा, वित्तीय सहयोग, प्रशिक्षण, मेंटरशिप और निर्णयकारी भूमिका में महिलाओं को प्राथमिकता देनी होगी। अगर यह मौका चूक गया तो आरक्षण भी दिखावा बन जाएगा। समावेशी और सशक्त लोकतंत्र के लिए अब निर्णायक और नीतिगत पहल ज़रूरी है। महिला आरक्षण की दहलीज़ पर लोकतंत्र: अब दलों को जिम्मेदारी उठानी होगी ---प्रियंका सौरभ 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम, यानी संविधान का 106वां संशोधन, भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में महिलाओं के प्रतिनि...
ज़ीरो डोज़ बच्चे: टीकाकरण में छूटे हुए भारत की तस्वीर

ज़ीरो डोज़ बच्चे: टीकाकरण में छूटे हुए भारत की तस्वीर

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ज़ीरो डोज़ बच्चे: टीकाकरण में छूटे हुए भारत की तस्वीर भारत में 2023 में 1.44 मिलियन बच्चे ‘ज़ीरो डोज़’ श्रेणी में थे, जिनमें अधिकांश गरीब, अशिक्षित, जनजातीय, मुस्लिम और प्रवासी समुदायों से आते हैं। भूगोलिक अवरोध, सामाजिक हिचकिचाहट, शहरी झुग्गियों में अव्यवस्थित शासन और निगरानी की कमी प्रमुख चुनौतियाँ हैं। मिशन इंद्रधनुष जैसी योजनाएँ सीमित प्रभावी रही हैं। समाधान के लिए समुदाय-आधारित सहभागिता, तकनीक आधारित ट्रैकिंग, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और सामाजिक व्यवहार परिवर्तन संचार आवश्यक है। जब तक हम नीति को अंतिम व्यक्ति के अधिकार से नहीं जोड़ते, सार्वभौमिक टीकाकरण केवल एक सपना बना रहेगा। न्यायपूर्ण स्वास्थ्य नीति ही भविष्य की नींव रख सकती है।  डॉ. सत्यवान सौरभ भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में सार्वभौमिक टीकाकरण केवल एक स्वास्थ्य अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा म...