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मतदाता सूची में सुधार पर सुप्रीम सहमति सराहनीय

मतदाता सूची में सुधार पर सुप्रीम सहमति सराहनीय

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मतदाता सूची में सुधार पर सुप्रीम सहमति सराहनीय-ललित गर्ग-बिहार में मतदाता सूची सुधार पर सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी सिर्फ एक न्यायिक फैसला नहीं, बल्कि लोकतंत्र के मूल्य को पुष्ट करने वाला ऐतिहासिक एवं प्रासंगिक निर्णय है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को बिहार में मतदाता सूची की समीक्षा के लिए आधार, राशन और वोटर कार्ड को भी मान्यता देने का सुझाव देकर आम लोगों की मुश्किल हल करने की कोशिश की है। इससे प्रक्रिया आसान होगी और आशंकाओं को कम करने में मदद मिलेगी। बेशक, फर्जी नाम मतदाता सूची में नहीं होने चाहिए लेकिन ऐसे अभियानों के दौरान आयोग का जोर ज्यादा से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से निकालने के बजाय, इस पर होना चाहिए कि एक भी नागरिक चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने से वंचित न रह जाए। विपक्ष को चाहिए कि वह इस फैसले को राजनीतिक हार न माने, बल्कि इसे एक अवसर माने, जनविश्वास अर्जित करने का, लोकतंत्र में आ...
मायावती ले सकती हैं आजम-ओवैसी का साथ

मायावती ले सकती हैं आजम-ओवैसी का साथ

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मायावती ले सकती हैं आजम-ओवैसी का साथअजय कुमार,वरिष्ठ पत्रकार उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही समीकरण बदल रहे हैं। मायावती, जो लंबे समय से दलित वोट बैंक की धुरी रही हैं, अब मुस्लिम वोटों को साधने की रणनीति पर काम कर रही हैं। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी (सपा) के कद्दावर नेता आजम खान के बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के करीब आने की चर्चाएं तेज हैं। यह घटनाक्रम सपा प्रमुख अखिलेश यादव के लिए सियासी चुनौती बन सकता है, क्योंकि उनकी पार्टी का आधार मुस्लिम और यादव वोटरों पर टिका है। मायावती ने 2024 के लोकसभा चुनावों में बसपा की कमजोर स्थिति को देखते हुए अपनी रणनीति बदली है। उनकी पार्टी, जो कभी दलितों की एकमात्र आवाज थी, अब केवल एक विधायक तक सिमट गई है। ऐसे में, मुस्लिम वोटरों को लुभाने के लिए मायावती पुराने गठजोड़ को फिर से तलाश रही हैं। आजम खान, जो सपा के वरिष्ठ नेता औ...
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मतदाता सूची में सुधार पर सुप्रीम सहमति सराहनीय-ललित गर्ग-बिहार में मतदाता सूची सुधार पर सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी सिर्फ एक न्यायिक फैसला नहीं, बल्कि लोकतंत्र के मूल्य को पुष्ट करने वाला ऐतिहासिक एवं प्रासंगिक निर्णय है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को बिहार में मतदाता सूची की समीक्षा के लिए आधार, राशन और वोटर कार्ड को भी मान्यता देने का सुझाव देकर आम लोगों की मुश्किल हल करने की कोशिश की है। इससे प्रक्रिया आसान होगी और आशंकाओं को कम करने में मदद मिलेगी। बेशक, फर्जी नाम मतदाता सूची में नहीं होने चाहिए लेकिन ऐसे अभियानों के दौरान आयोग का जोर ज्यादा से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से निकालने के बजाय, इस पर होना चाहिए कि एक भी नागरिक चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने से वंचित न रह जाए। विपक्ष को चाहिए कि वह इस फैसले को राजनीतिक हार न माने, बल्कि इसे एक अवसर माने, जनविश्वास अर्जित करने का, लोकतंत्र में आ...
नेताओं की सियासी फायदे वाली चुप्पी और हंगामे वाला ड्रामा

नेताओं की सियासी फायदे वाली चुप्पी और हंगामे वाला ड्रामा

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नेताओं की सियासी फायदे वाली चुप्पी और हंगामे वाला ड्रामासंजय सक्सेना,लखनऊ  भारत की राजनीति एक ऐसा मंच है, जहां हर दिन नया ड्रामा, नया विवाद और नई कहानियां जन्म लेती हैं। यह वह रंगमंच है, जहां राजनैतिक दल और उनके नेता कभी किसी मुद्दे पर गहरी चुप्पी साध लेते हैं, तो कभी मामूली-सी बात को लेकर हंगामा खड़ा कर देते हैं। यह चुप्पी और हंगामा, दोनों ही उनकी सियासत का हिस्सा हैं। एक सोची-समझी रणनीति, जो जनता के मन को भटकाने, सहानुभूति बटोरने या विरोधियों को घेरने के लिए रची जाती है। इस सियासत की परतें इतनी जटिल हैं कि आम आदमी अक्सर यह समझ ही नहीं पाता कि आखिर माजरा क्या है। ताजा मामला महाराष्ट्र में भाषा विवाद से जुड़ा हुआ है जहां मराठी की अस्मिता के नाम पर उत्तर भारतीयों को मारा-पीटा जा रहा है और इस पर उत्तर भारत में राजनीति करने वाले नेता तक मुंह खोलने से कतरा रहे हैं। कांग्रेस और उसके नेता रा...
 “रेखा गुप्ता का सियासी सफर: दिल्ली की सत्ता में बदलाव की दस्तावेज़ी कहानी”

 “रेखा गुप्ता का सियासी सफर: दिल्ली की सत्ता में बदलाव की दस्तावेज़ी कहानी”

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 "रेखा गुप्ता का सियासी सफर: दिल्ली की सत्ता में बदलाव की दस्तावेज़ी कहानी" 2025 के चुनावों के बहाने भारतीय लोकतंत्र, नेतृत्व और नारी शक्ति के उत्कर्ष की विश्लेषणात्मक प्रस्तुति लेखक: गोपाल शर्मा समीक्षक : उमेश कुमार सिंह  "दिल्ली 2025: रेखा गुप्ता का सियासी सफर" एक राजनीतिक यात्रा का ऐसा लेखबद्ध दस्तावेज़ है जो महज घटनाओं की श्रृंखला नहीं, बल्कि उन घटनाओं के पीछे की मानसिकता, रणनीति और नेतृत्व दृष्टिकोण को भी उजागर करता है। यह पुस्तक भारत की राजधानी दिल्ली के 2025 के ऐतिहासिक चुनावों के बहाने भारतीय लोकतंत्र के चरित्र, मतदाता की परिपक्वता और नेतृत्व परिवर्तन की जटिल प्रक्रियाओं की पड़ताल करती है। लेखक गोपाल शर्मा, जिन्होंने शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में वर्षों तक अपना योगदान दिया है, इस राजनीतिक यात्रा को एक अनुभवी साहित्यकार और गहन ...
महिला आरक्षण की दहलीज़ पर लोकतंत्र: अब दलों को जिम्मेदारी उठानी होगी

महिला आरक्षण की दहलीज़ पर लोकतंत्र: अब दलों को जिम्मेदारी उठानी होगी

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महिला आरक्षण की दहलीज़ पर लोकतंत्र: अब दलों को जिम्मेदारी उठानी होगी 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत में राजनीति के स्वरूप को बदलने का ऐतिहासिक अवसर है। हालांकि इसका क्रियान्वयन 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले संभव है, लेकिन यह तभी सफल होगा जब राजनीतिक दल अभी से महिलाओं के लिए अनुकूल वातावरण बनाएँ। केवल आरक्षित सीटें देना पर्याप्त नहीं; दलों को आंतरिक कोटा, वित्तीय सहयोग, प्रशिक्षण, मेंटरशिप और निर्णयकारी भूमिका में महिलाओं को प्राथमिकता देनी होगी। अगर यह मौका चूक गया तो आरक्षण भी दिखावा बन जाएगा। समावेशी और सशक्त लोकतंत्र के लिए अब निर्णायक और नीतिगत पहल ज़रूरी है। महिला आरक्षण की दहलीज़ पर लोकतंत्र: अब दलों को जिम्मेदारी उठानी होगी ---प्रियंका सौरभ 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम, यानी संविधान का 106वां संशोधन, भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में महिलाओं के प्रतिनि...
संवाद की भाषा में न हार, न जीत केवल समझदारी जन्मती है : ओम बिरला

संवाद की भाषा में न हार, न जीत केवल समझदारी जन्मती है : ओम बिरला

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‘संवाद से समाधान’ परिचर्चा का आयोजन : संवाद बना संकल्प, समाधान बनी संस्कृति संवाद की भाषा में न हार, न जीत केवल समझदारी जन्मती है : ओम बिरला मुम्बई, 24 जून 2025 देश की औद्योगिक राजधानी मुंबई की पुण्यभूमि पर तीर्थंकर भगवान महावीर के सिद्धांतों- अहिंसा, समता, सत्य और अपरिग्रह पर आधारित “संवाद से समाधान-एक परिचर्चा” का भव्यतम आयोजन महावीरायतन फाउंडेशन के तत्वावधान में यशवंतराव चव्हाण सभागृह में सम्पन्न हुआ। आयोजन का उद्देश्य था- धर्म, शासन और समाज के बीच सार्थक संवाद के माध्यम से सामाजिक समाधान की दिशा तय करना। विशेषतः युद्ध एवं आतंक की परिस्थितियों में विश्व को संवाद की सार्थकता से परिचित कराना। इस ऐतिहासिक आयोजन के प्रेरणास्रोत एवं परिकल्पनाकार स्वामी देवेंद्र ब्रह्मचारी रहे, उनके मार्गदर्शन में अंतरधार्मिक संवाद की यह श्रृंखला नव ऊर्जा, नव विश्वास और समाधान की संस्कृति का परिच...
वैश्विक स्तर पर भारत के विरुद्ध पुनः गढ़े जा रहे झूठे विमर्श

वैश्विक स्तर पर भारत के विरुद्ध पुनः गढ़े जा रहे झूठे विमर्श

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वैश्विक स्तर पर भारत के विरुद्ध पुनः गढ़े जा रहे झूठे विमर्श वैश्विक स्तर पर आर्थिक जगत में भारत का उदय कुछ देशों को रास नहीं आ रहा है। विकसित देशों के बीच पूरे विश्व में भारत आज सबसे तेज गति से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है। जापान, ब्रिटेन, फ्रांन्स, इटली आदि देशों से आगे निकलते हुए भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और शीघ्र ही लगभग एक वर्ष के बाद जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए भारत के विश्व की तीसरी&n...
 सुविधा और दुविधा में फंसी यूपी के बेसिक शिक्षकों की तबादला नीति

 सुविधा और दुविधा में फंसी यूपी के बेसिक शिक्षकों की तबादला नीति

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 सुविधा और दुविधा में फंसी यूपी के बेसिक शिक्षकों की तबादला नीति संजय सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए सात साल बाद तबादले खोलकर षिक्षक समाज को बड़ी राहत प्रदान की है।  सरकार द्वारा अंतर-जनपदीय और जिला-स्तरीय तबादलों का रास्ता खुलने से शिक्षक खुश  तो हैं,लेकिन इसमें वह (शिक्षक) कुछ कमियों की बात करते हुए इन्हें दूर करने की  बात भी कह रहे हैं। तबादला प्रक्रिया शिक्षकों के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित थी, क्योंकि कई शिक्षक अपने गृह जनपद या परिवार के नजदीक स्थानांतरित होने की उम्मीद में वर्षों से इंतजार कर रहे थे। इस प्रक्रिया की शुरुआत जून 2025 में हुई, जब बेसिक शिक्षा परिषद ने शिक्षकों के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू की। लेकिन जैसे-जैसे यह प्रक्रिया आगे बढ़ी, शिक्षकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा, ...
राजनीति को नई दिशा देते विपक्षी दलों के नये चेहरें

राजनीति को नई दिशा देते विपक्षी दलों के नये चेहरें

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राजनीति को नई दिशा देते विपक्षी दलों के नये चेहरें- ललित गर्ग - सिंदूर ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान दुनिया से सहानुभूति बटोरने के लिये जहां विश्व समुदाय में अनेक भ्रम, भ्रांतिया एवं भारत की छवि को छिछालेदार करने में जुटा है, वहीं भारत का डर दिखा-दिखा कर ही पाक अनेक देशों से आर्थिक मदद मांग रहा है। इन्हीं स्थितियों को देखते हुए दुनिया के सामने भारत का पक्ष रखने के लिए केंद्र सरकार ने जिस तरह से सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों का गठन किया है और इन दलों में विपक्षी दलों के सांसद एवं नेताओं ने भारत का पक्ष बिना आग्रह, दुराग्रह एवं पूर्वाग्रह के दुनिया के सामने रखा, उसकी जितनी सराहना की जाये, कम है। इन विपक्षी नेताओं ने विदेश में भारतीय राष्ट्रवाद को सशक्त एवं प्रभावी तरीकों से व्यक्त किया। देश ने इन नेताओं को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते और एक लय में आगे बढ़ते देखा, जबकि संसद में वे केवल आपस में...