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Tag: Breaking news april 2025

मजदूर दिवस: एक दिन सम्मान, साल भर अपमान

मजदूर दिवस: एक दिन सम्मान, साल भर अपमान

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मजदूर दिवस: एक दिन सम्मान, साल भर अपमान — प्रियंका सौरभ मजदूर दिवस केवल एक तारीख नहीं, श्रमिकों की मेहनत, संघर्ष और हक की पहचान है। 1 मई को मनाया जाने वाला यह दिन उस आंदोलन की याद है जिसने काम के सीमित घंटे, सम्मानजनक वेतन और श्रम अधिकारों की लड़ाई लड़ी। लेकिन भारत जैसे देशों में मजदूर आज भी असंगठित, असुरक्षित और उपेक्षित हैं। महिला श्रमिकों की स्थिति और भी दयनीय है। एक दिन की प्रतीकात्मक श्रद्धांजलि से आगे बढ़कर हमें हर दिन श्रमिकों को सम्मान, सुरक्षा और न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध होना होगा। तभी मजदूर दिवस वास्तव में सार्थक होगा। हर वर्ष 1 मई को मनाया जाने वाला मजदूर दिवस, श्रमिकों के संघर्ष, बलिदान और अधिकारों की रक्षा का प्रतीक है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि समाज की नींव उन हाथों से बनती है जो दिन-रात मेहनत करते हैं। लेकिन क्या हम सच में इन मेहनतकशों को वह सम्मान औ...
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती रुपए की ताकत एवं भारत में बढ़ता विदेशी मुद्रा भंडार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती रुपए की ताकत एवं भारत में बढ़ता विदेशी मुद्रा भंडार

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती रुपए की ताकत एवं भारत में बढ़ता विदेशी मुद्रा भंडार दिनांक 7 फरवरी 2025 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपए की कीमत सबसे निचले स्तर अर्थात 87.44 रुपए प्रति अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गई थी। इसके बाद धीरे धीरे इसमें सुधार होता हुआ दिखाई दिया है एवं अब दिनांक 30 अप्रेल 2025 को यह 84.50 रुपए प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गई है। वहीं दिनांक 18 अप्रेल 2025 को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी तेज गति से आगे बढ़ता हुआ 68,610 करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है और यह दिनांक 27 सितम्बर 2024 के उच्चतम स्तर 70,489 करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर के बहुत करीब है। भारतीय रुपए की मजबूती एवं विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि ऐसे समय में हो रही है जब विश्व के समस्त देश अमेरिकी प्रशासन के टैरिफ युद्ध का सामना करते हुए संकट में दिखाई दे रहे हैं। परंतु, भा...
आदि शंकराचार्य जयन्ती – 2 मई, 2025

आदि शंकराचार्य जयन्ती – 2 मई, 2025

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आदि शंकराचार्य ने हिन्दू संस्कृति को पुनर्जीवित किया - ललित गर्ग- महापुरुषों की कीर्ति युग-युगों तक स्थापित रहती। उनका लोकहितकारी चिंतन, दर्शन एवं कर्तृत्व कालजयी होता है, सार्वभौमिक, सार्वदैशिक एवं सार्वकालिक होता है और युगों-युगों तक समाज का मार्गदर्शन करता हैं। आदि शंकराचार्य हमारे ऐेसे ही एक प्रकाशस्तंभ हैं जिन्होंने एक महान हिंदू धर्माचार्य, दार्शनिक, गुरु, योगी, धर्मप्रवर्तक और संन्यासी के रूप में 8वीं शताब्दी में अद्वैत वेदांत दर्शन का प्रचार किया था। हिन्दुओं को संगठित किया। उन्होंने चार मठों की स्थापना की, जो भारत के विभिन्न हिस्सों में स्थित हैं। आदि गुरु शंकराचार्य हिंदू धर्म में एक विशेष स्थान रखते हैं, उनके विराट व्यक्तित्व को किसी उपमा से उपमित करने का अर्थ है उनके व्यक्तित्व को ससीम बनाना। उनके लिये इतना ही कहा जा सकता है कि वे अनिर्वचनीय है। उन्हें हम धर्मक्रांति एवं सम...
अंततः देश में जाति जनगणना: प्रतिनिधित्व या पुनरुत्थान?

अंततः देश में जाति जनगणना: प्रतिनिधित्व या पुनरुत्थान?

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अंततः देश में जाति जनगणना: प्रतिनिधित्व या पुनरुत्थान?  - प्रियंका सौरभ भारत में दशकों से केवल अनुसूचित जातियों और जनजातियों की गिनती होती रही है, जबकि अन्य जातियाँ नीति निर्माण में अदृश्य रहीं। जाति जनगणना केवल गिनती नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की नींव है। बिना सटीक आंकड़ों के आरक्षण, योजनाएं और संसाधन वितरण अधूरे रहेंगे। विरोध करने वालों को डर है कि उनके विशेषाधिकार चुनौती में पड़ सकते हैं। लेकिन यह गिनती वंचितों की दृश्यता और भागीदारी सुनिश्चित करने का औज़ार है, न कि समाज को तोड़ने का। जब नीति जाति पर आधारित हो, तो डेटा भी होना चाहिए। भारत को जातियों में बाँटा गया, लेकिन उसे जोड़ने की कोशिश कभी पूरी ईमानदारी से नहीं हुई। संविधान ने सबको समानता का अधिकार दिया, मगर समान अवसर की नींव जातिगत असमानता को पहचानने पर ही टिकती है। इसी बुनियाद पर जब आज जाति जनगणना की मांग ज़ोर पकड़ रह...
श्रीकृष्ण-भक्ति के दिव्य एवं अलौकिक प्रतीक हैं सूरदास

श्रीकृष्ण-भक्ति के दिव्य एवं अलौकिक प्रतीक हैं सूरदास

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सूरदास जयन्ती- 2 मई, 2025श्रीकृष्ण-भक्ति के दिव्य एवं अलौकिक प्रतीक हैं सूरदास- ललित गर्ग-इस संसार में यदि सबसे बड़ा कोई संगीतकार है तो वो हैं श्रीकृष्ण। जिस प्रकार से तत्व, रज और तम-इन तीनों गुणों के समन्वय को प्रकृति कहा गया है, उसी प्रकार से गायन, वादन और भक्ति इन तीनों में जो रमा हो, जो पारंगत हो उसे श्रीकृष्ण-भक्त गया गया है। ऐसे ही दिव्य एवं अलौकिक श्रीकृष्ण भक्ति के एक महान् चितेरे एवं श्रीकृष्ण भक्ति को समर्पित शीर्षस्थ भक्त-कवि व्यक्तित्व हैं सूरदासजी। वे एक दृष्टिहीन संत थे, जिन्होंने पूरी दुनिया को श्रीकृष्ण भक्ति का मार्ग दिखाया। वे बचपन से ही भगवान श्रीकृष्ण के प्रति समर्पित थे और उनकी भक्ति में पूरी तरह से डूब गए। वे एक महान भक्ति कवि एवं हिन्दी साहित्य के सूर्य माने जाते हैं। उनका आदर्श चरित्र और जीवन दर्शन अंधेरे को भी उजाला प्रदान करता है। वे जहां भक्त, वैरागी, त्यागी और ...
बेतुके बयानों से बचें एवं राजनीतिक सहमति कायम रखें

बेतुके बयानों से बचें एवं राजनीतिक सहमति कायम रखें

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बेतुके बयानों से बचें एवं राजनीतिक सहमति कायम रखें- ललित गर्ग- पहलगाम की बर्बर आतंकी घटना ने भारत की आत्मा पर सीधा हमला किया है, इसमें पाकिस्तान की स्पष्ट भूमिका को देखते हुए देश की एक सौ चालीस करोड जनता चाहती है कि अब पाकिस्तान को सबक सीखाना जरूरी हो गया है, नरेन्द्र मोदी सरकार ने भी इसे गंभीरता से लिया और पाकिस्तान के खिलाफ कठोर एक्शन लेते हुए सिंधु जल को रोकने जैसे पांच कदम उठाये। दोनों ही देशों के बीच युद्ध की स्थिति बनी है, यह पहली बार देखने को मिला है कि इस घटना को लेकर कश्मीर सहित समूचा देश एक दिखाई दे रहा है। ऐसे क्रूर, आतंकी एवं अमानवीय हमले के वक्त में पूरा देश दुख और गुस्से की मनःस्थिति से गुजर रहा है, जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने शांति और सांप्रदायिक सद्भाव का एक सशक्त संदेश दिया है। सभी राजनीतिक दल, जाति, वर्ग, धर्म के लोग पाकिस्तान को करारा जबाव देने के लिये मोदी सरकार के हर ...
अक्षय तृतीया: समृद्धि, पुण्य और शुभारंभ का पर्व

अक्षय तृतीया: समृद्धि, पुण्य और शुभारंभ का पर्व

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अक्षय तृतीया: समृद्धि, पुण्य और शुभारंभ का पर्व -प्रियंका सौरभ अक्षय तृतीया, जिसे 'आखा तीज' भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला एक अत्यंत पावन पर्व है। 'अक्षय' का अर्थ होता है—जो कभी क्षय (नाश) न हो। यही कारण है कि यह दिन शुभ कार्यों, दान-पुण्य, निवेश और नए आरंभ के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। यह दिन विशेष रूप से मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे हृदय से पूजा-पाठ, व्रत और दान करने से न केवल वर्तमान जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है, बल्कि अगले जन्मों तक अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।पुराणों के अनुसार, इसी दिन सतयुग और त्रेतायुग का प्रारंभ हुआ था। भगवान परशुराम का जन्म भी इसी तिथि को हुआ था। महाभारत में वर्णित है कि इसी दिन युधिष्ठिर को अक्षय पात्र की प्राप्ति ह...
पहलगाम आतंकवादी हमला {वैश्विक जगत भारत के साथ वहीं भारत के विरोधी दल देश के गुनाहगारों के साथ}

पहलगाम आतंकवादी हमला {वैश्विक जगत भारत के साथ वहीं भारत के विरोधी दल देश के गुनाहगारों के साथ}

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पहलगाम आतंकवादी हमला {वैश्विक जगत भारत के साथ वहीं भारत के विरोधी दल देश के गुनाहगारों के साथ}मृत्युंजय दीक्षितकश्मीर घाटी के पहलगाम हमले में 26 निहत्थे निर्दोष पर्यटकों की धर्म पूछकर और कलमा न पढ़ पाने पर की गई नृशंस हत्याओं के बाद, देश में आतंकवाद के खिलाफ भीषण आक्रोश है। देश का जन जन पाकिस्तान से बदला लेने के लिए तड़प रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले बिहार की मधुबनी रैली में और फिर “मन की बात“ रेडियो कार्यक्रम में देश को विश्वास दिलाया है कि पीड़ितों को न्याय मिलकर रहेगा तथा पाकिस्तान को ऐसा दंड दिया जाएगा जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की होगी । आतंकवादी घटनाओं के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि देश के गृहमंत्री तुरंत अपने सभी कार्यक्रम रद्द करके घटनास्थल पहुंचे और पीड़ितों के साथ खड़े रहे। इस घटना के बाद से भारत के आतंकवाद से निपटने के निर्णय को विश्व के सभी प्रमुख देशों ने अपना प...
डिजिटल युग में बच्चे गुस्सैल और आक्रामक क्यों?

डिजिटल युग में बच्चे गुस्सैल और आक्रामक क्यों?

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डिजिटल युग में बच्चे गुस्सैल और आक्रामक क्यों? विनीत नारायणआज के डिजिटल युग में, बच्चों का व्यवहार और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। माता-पिता और शिक्षक अक्सर यह शिकायत करते हैं कि बच्चे पहले की तुलना में अधिक गुस्सैल, चिड़चिड़े और आक्रामकहो गए हैं। इसका एक प्रमुख कारण बच्चों का कम उम्र में मोबाइल फोन और इंटरनेट का अत्यधिक उपयोग है।प्रारंभिक स्क्रीन टाइम और डिजिटल दुनिया बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास को नकारात्मक रूप सेप्रभावित कर रही है, जिसके परिणामस्वरूप उनमें गुस्सा और आक्रामकता बढ़ रही है।आज के बच्चे ‘डिजिटल नेटिव्स’ हैं, यानी वे उस दुनिया में पैदा हुए हैं जहां स्मार्टफोन, टैबलेट और इंटरनेट रोजमर्रा कीजिंदगी का हिस्सा हैं। पहले जहां बच्चे खेल के मैदान में दोस्तों के साथ समय बिताते थे, वहीं अब वे मोबाइल स्क्रीन परगेम खेलने, वीडियो देखने और सोशल मीडि...
भारत की प्रतिक्रिया का और विस्तार ज़रूरी

भारत की प्रतिक्रिया का और विस्तार ज़रूरी

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भारत की प्रतिक्रिया का और विस्तार ज़रूरी पहलगाम आतंकी हमले की प्रतिक्रिया में भारत की मोदी सरकार ने पाकिस्तान के विरुद्ध कुछ कठोर कदम उठाए हैं, राजनयिक संबंध लगभग तोड़ दिए गए हैं और 1960 की ऐतिहासिक सिंधु जल संधि तुरंत प्रभाव से स्थगित कर दी गई है। यह संधि विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई थी। अब पाकिस्तान वालों को भारत आने का, किसी भी तरह का, वीजा नहीं दिया जाएगा। सार्क देश होने के कारण जो छूट थी, उसे भी रद्द कर दिया गया है। राजनयिकों को भारत छोडऩे को मात्र एक सप्ताह का वक्त दिया गया है। नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान के उच्चायोग में रक्षा, नौसेना, वायुसेना, थलसेना आदि के सलाहकारों को भी 48 घंटे में भारत छोडऩे के आदेश दे दिए गए हैं। अटारी-वाघा सीमा चेकपोस्ट को बंद कर दिया गया है। इस रास्ते से भारत में प्रवेश करने वाले पाकिस्तानी एक मई से पहले लौट जाएं। पाकिस्तान उच्चायोग में 55 कर्मचारियों...