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उपजाऊ भूमि को मरुस्थल होने से बचाना होगा

उपजाऊ भूमि को मरुस्थल होने से बचाना होगा

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उपजाऊ भूमि को मरुस्थल होने से बचाना होगा-ः ललित गर्ग:- मानव एवं जीव-जंतुओं का जीवन भूमि पर निर्भर है। फिर भी, पूरी दुनिया में प्रदूषण, भूमि का दोहन, जलवायु अराजकता और जैव विविधता विनाश का एक जहरीला मिश्रण स्वस्थ भूमि को रेगिस्तान में बदल रहा है और संपन्न पारिस्थितिकी तंत्र मृत क्षेत्रों में बदल रहा है। ‘हमारी भूमि’ नारे के तहत भूमि बहाली, मरुस्थलीकरण और सूखा निवारण आज की जलवायु समस्याओं का सटीक समाधान हो सकता है,  इसी को ध्यान में रखते हुए विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा निवारण दिवस 17 जून को मनाया जाता है। यह दिन मरुस्थलीकरण और सूखे से निपटने के लिए जागरूकता बढ़ाने और लोगों को एकजुट करने के लिए मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम है ‘भूमि के लिए एकजुट। हमारी विरासत। हमारा भविष्य’ है, संयुक्त राष्ट्र के अनुसार यह दिवस पर भूमि के महत्व और इसे भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने की आवश्यकता पर प्रका...
स्वैच्छिक रक्तदान की संस्कृति को बढ़ावा देकर उजाला बने

स्वैच्छिक रक्तदान की संस्कृति को बढ़ावा देकर उजाला बने

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स्वैच्छिक रक्तदान की संस्कृति को बढ़ावा देकर उजाला बने -ः ललित गर्ग:- किसी के जीवन में रंग भरने का, जीवन और मौत के बीच जूझ रहे लोगों को जीवन देने का और अधिक स्वास्थ्य संकट से घीरे व्यक्ति के जीवन में आशा की किरण बनने का सशक्त माध्यम है रक्तदान। दुनिया भर में अनगिनत लोगों को रक्त की अपेक्षा होती है, इसलिये रक्तदान-महादान है। रक्तदान के महत्व को उजागर करने के लिये विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा हर साल 14 जून को ‘विश्व रक्तदान दिवस’ मनाया जाता है। किसी व्यक्ति के जीवन में रक्तदान के महत्व को समझाने के साथ ही रक्तदान करने के लिये आम इंसान को प्रेरित एवं प्रोत्साहित करने के लिये यह दिवस मनाया जाता है। इंसान की सम्पत्ति का कोई मतलब नहीं अगर उसे बांटा और उपयोग में नहीं लाया जाए, चाहे वे शरीर का रक्त ही क्यों न हो। किसी व्यक्ति की रक्तअल्पता के कारण मृत्यु न हो, इस दृष्टि से रक्तदान एक महान् दान...
 सुविधा और दुविधा में फंसी यूपी के बेसिक शिक्षकों की तबादला नीति

 सुविधा और दुविधा में फंसी यूपी के बेसिक शिक्षकों की तबादला नीति

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 सुविधा और दुविधा में फंसी यूपी के बेसिक शिक्षकों की तबादला नीति संजय सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए सात साल बाद तबादले खोलकर षिक्षक समाज को बड़ी राहत प्रदान की है।  सरकार द्वारा अंतर-जनपदीय और जिला-स्तरीय तबादलों का रास्ता खुलने से शिक्षक खुश  तो हैं,लेकिन इसमें वह (शिक्षक) कुछ कमियों की बात करते हुए इन्हें दूर करने की  बात भी कह रहे हैं। तबादला प्रक्रिया शिक्षकों के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित थी, क्योंकि कई शिक्षक अपने गृह जनपद या परिवार के नजदीक स्थानांतरित होने की उम्मीद में वर्षों से इंतजार कर रहे थे। इस प्रक्रिया की शुरुआत जून 2025 में हुई, जब बेसिक शिक्षा परिषद ने शिक्षकों के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू की। लेकिन जैसे-जैसे यह प्रक्रिया आगे बढ़ी, शिक्षकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा, ...
संविधान की रक्षा में न्यायपालिका कहां कर रहा है चूक ?

संविधान की रक्षा में न्यायपालिका कहां कर रहा है चूक ?

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संविधान की रक्षा में न्यायपालिका कहां कर रहा है चूक ? संजय सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार विविधताओं से भरे भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में न्यायपालिका को संविधान का सबसे बड़ा रक्षक माना जाता है। यह न केवल कानून की व्याख्या करती है, बल्कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा भी करती है,लेकिन क्या ऐसा करते समय न्यायपालिका से कहीं न कहीं चूक हो जाती है ? या फिर जानबूझ कर अथवा अंजाने में कुछ न्यायविद किसी मुकदमे में फैसला सुनाते समय व्यक्तिगत हो जाते हैं,जिसको लेकर विरोधाभास भी हो जाता है। जबकि राष्ट्रहित और आतंकवादी घटनाओं से जुड़े मामलों में न्यायपालिका का हस्तक्षेप कई बार विवादों को जन्म देता है। नया कृषि कानून, वक्फ बोर्ड संशोधन कानून में सुप्रीम कोर्ट की अति सक्रियता इसकी बड़ी मिसाल हैं। यह हस्तक्षेप कब रक्षक की भूमिका निभाता है और कब खतरनाक साबित हो सकता है, इसको लेकर अक्सर विवाद बना रहता ह...
बहुजन मंच की पुरानी विरासत पर चंद्रशेखर की नई बुनियाद

बहुजन मंच की पुरानी विरासत पर चंद्रशेखर की नई बुनियाद

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बहुजन मंच की पुरानी विरासत पर चंद्रशेखर की नई बुनियाद संजय सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर नई करवट लेती नजर आ रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव भले ही अभी दो साल दूर हों, लेकिन सियासी सरगर्मियां अभी से तेज़ होती जा रही हैं। भारतीय जनता पार्टी जहां अपनी सत्ता बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है, वहीं समाजवादी पार्टी सामाजिक समीकरणों के सहारे वापसी की राह तलाश रही है। कांग्रेस भी खोई हुई जमीन की तलाश में सक्रिय हो चुकी है। लेकिन इन तमाम प्रमुख दलों के बीच बहुजन राजनीति में हलचल तब तेज़ हो गई जब आज़ाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती को सीधे चुनौती दे डाली।झांसी में हाल ही में आयोजित ‘प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन’ में चंद्रशेखर ने न सिर्फ बसपा की नीतियों को निशाने पर लिया, बल्कि मायावती के नेतृत्व पर भी सवाल...
केंद्र सरकार के उपक्रम बन रहे कमाऊ पूत

केंद्र सरकार के उपक्रम बन रहे कमाऊ पूत

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केंद्र सरकार के उपक्रम बन रहे कमाऊ पूत आज से एक दशक से अधिक समय पूर्व तक केंद्र सरकार के उपक्रमों को चलायमान बनाए रखने के लिए केंद्रीय बजट में भारी भरकम राशि का प्रावधान करना पड़ता था तथा इन उपक्रमों को केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की जाती थी। परंतु, आज स्थिति एकदम बदल गई है एवं अब केंद्र सरकार के उपक्रम केंद्र सरकार को लाभांश के रूप में भारी भरकम राशि प्रदान कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में केंद्र सरकार के विभिन्न उपक्रमों ने 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि का लाभ अर्जित किया है। केंद्र सरकार के उपक्रमों में यह आमूलचूल परिवर्तन केंद्र में ईमानदार सरकार एवं केंद्र सरकार द्वारा निगमित अभिशासन से सम्बंधित नियमों का कड़ाई से अनुपालन कराए जाने के चलते ही सम्भव हो सका है। पूर्व में इन उपक्रमों में पनप रहे भ्रष्टाचार के चलते इन उपक्रमों की लाभप्रदता पर विपरीत प्रभाव पड़ता...
मन्दिरों में पैसे लेकर एवं वीआईपी दर्शन बन्द हो

मन्दिरों में पैसे लेकर एवं वीआईपी दर्शन बन्द हो

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मन्दिरों में पैसे लेकर एवं वीआईपी दर्शन बन्द हो-ः ललित गर्ग:- ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में पैसे लेकर दर्शन कराने वाले बाउंसरों की गिरफ्तारी के बाद श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में सुगम दर्शन के नाम पर एक साथ इक्कीस लोगों की गिरफ्तारी जहां मंदिर प्रशासन की व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह है, वही ईश्वर के दरबार में पांव फैला रहा भ्रष्टाचार गहन चिन्ताजनक एवं शर्मनाक हैं। कुछ ही दिनों पहले ओंकारेश्वर स्थित ममलेश्वर मंदिर में भक्तों से वीआइपी दर्शन के नाम पर अवैध वसूली करने पर प्रशासन ने एक होमगार्ड जवान और दो पंडितों पर कार्रवाई की है। देश-विदेश  के भक्त अगाध श्रद्धा से अपने आराध्य का दर्शन करने आते हैं, लेकिन देश के प्रमुख मन्दिरों में सीधे दर्शन कराने के नाम पर पैसों की लूट मची है या वीआईपी संस्कृति के नाम पर त्रासद एवं भेदभावपूर्ण स्थितियां पसरी है। सवाल यह पूछा जा रहा है कि हिंदुओं के धार्मिक स्थलों ...
पिता-पुत्र का रिश्ता बेजोड़ एवं विलक्षण है

पिता-पुत्र का रिश्ता बेजोड़ एवं विलक्षण है

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अंतर्राष्ट्रीय पिता दिवस- 15 जून, 2025पिता-पुत्र का रिश्ता बेजोड़ एवं विलक्षण है- ललित गर्ग- भारतीय संस्कृति में पिता का स्थान आकाश से भी ऊंचा माना गया है, पिता की धर्म है, पिता ही संबल है, पिता ही ताकत है। पिता हर संतान के लिए एक प्रेरणा हैं, एक प्रकाश हैं और संवेदनाओं के पुंज हैं। इसके महत्व को दर्शाने और पिता व पिता तुल्य व्यक्तियों के योगदान को सम्मान देने के लिए हर साल जून महीने के तीसरे रविवार को अंतर्राष्ट्रीय पिता दिवस यानी फादर्स डे मनाया जाता है। इस साल 15 जून 2025 को भारत समेत विश्वभर में यह दिवस मनाया जायेगा। फादर्स डे 2025 का आधिकारिक थीम ‘पिताः लचीलेपन का पोषण और भविष्य को आकार देना’ है। यह थीम हमारे जीवन में पिताओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालती है, जो बच्चों में सकारात्मक भावनाओं और सामाजिक विकास को बढ़ावा देते हैं। दुनिया के अलग-अलग देशों में अलग-अलग दिन और विविध...
वायरल और प्रसिद्ध होने के लिए कुछ भी!

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वायरल और प्रसिद्ध होने के लिए कुछ भी!रजनीश कपूरआज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया ने लोगों को अपनी बात दुनिया तक पहुंचाने का एक शक्तिशाली मंच प्रदान कियाहै। यह मंच जहां एक ओर रचनात्मकता, ज्ञान और सकारात्मक संदेशों को फैलाने का अवसर देता है, वहीं दूसरी ओर कुछलोग इस मंच का दुरुपयोग भी कर रहे हैं। एक चिंताजनक प्रवृत्ति जो हाल के वर्षों में उभरी है, वह है सार्वजनिक स्थानों परअश्लीलता के जरिए वायरल होने और प्रसिद्धि हासिल करने की कोशिश। यह न केवल सामाजिक मूल्यों को ठेस पहुंचाता है,बल्कि समाज में नैतिकता और संस्कृति के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करता है।सोशल मीडिया पर वायरल होने की होड़ ने कई लोगों को गलत रास्ते पर धकेल दिया है। कुछ लोग त्वरित प्रसिद्धि के लिएसार्वजनिक स्थानों पर अश्लील व्यवहार, अभद्र भाषा, अनुचित कपड़े या आपत्तिजनक हरकतें करते हैं और इसे रिकॉर्ड करकेऑनलाइन डाल देते हैं। उदाहरण के तौ...
केरल में भारत माता का अपमान यह केवल चित्र नहीं देश की आत्मा पर चोट है!

केरल में भारत माता का अपमान यह केवल चित्र नहीं देश की आत्मा पर चोट है!

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केरल में भारत माता का अपमान यह केवल चित्र नहीं देश की आत्मा पर चोट है! अजय कुमार,वरिष्ठ पत्रकार भारत माता… एक ऐसा नाम, एक ऐसा भाव, जो करोड़ों भारतीयों के दिल की धड़कन है। जब कोई "भारत माता की जय" बोलता है, तो ये केवल एक नारा नहीं होता, बल्कि एक ऐसी पुकार होती है, जिसमें देशभक्ति, श्रद्धा और मातृत्व का गहरा बोध समाहित होता है। लेकिन दुर्भाग्य देखिए, उसी भारत माता की तस्वीर अब देश के भीतर विवाद की जड़ बन रही है। जिस तस्वीर के सामने स्वतंत्रता सेनानी सिर झुकाकर बलिदान की प्रेरणा लेते थे, उसे देखकर अब केरल के एक मंत्री की आंखें चुभने लगी हैं। केरल के कृषि मंत्री पी प्रसाद ने पर्यावरण दिवस पर राजभवन में आयोजित कार्यक्रम का सिर्फ इसलिए बहिष्कार कर दिया क्योंकि मंच पर भारत माता की तस्वीर लगी थी। यह घटना एक प्रतीक भर नहीं है, यह उस वैचारिक युद्ध की प्रत्यक्ष झलक है जो अब भारत की आत्मा से टक...