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कोचिंग का क्रेडिट, स्कूल की गुमनामी: शिक्षकों के साथ यह अन्याय कब तक?

कोचिंग का क्रेडिट, स्कूल की गुमनामी: शिक्षकों के साथ यह अन्याय कब तक?

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कोचिंग का क्रेडिट, स्कूल की गुमनामी: शिक्षकों के साथ यह अन्याय कब तक? आज कोचिंग संस्थानों को छात्रों की सफलता का सारा श्रेय मिलता है, जबकि वे शिक्षक गुमनाम रह जाते हैं जिन्होंने वर्षों तक नींव रखी। यह संपादकीय उसी विस्मृति की पीड़ा को उजागर करता है। स्कूल और कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षक सिर्फ परीक्षा नहीं, सोच, भाषा और संस्कार गढ़ते हैं। कोचिंग एक पड़ाव है, पर शिक्षकों की तपस्या पूरी यात्रा का आधार। शिक्षा में श्रेय का यह असंतुलन सामाजिक और नैतिक रूप से अन्यायपूर्ण है – और इसे सुधारने की सख्त ज़रूरत है। -डॉ सत्यवान सौरभ आज जब भी कोई छात्र NEET, JEE, UPSC या अन्य प्रतियोगी परीक्षा में चयनित होता है, तो मीडिया उसकी सफलता को कोचिंग संस्थान की सफलता के रूप में प्रस्तुत करता है। बधाइयाँ, होर्डिंग्स, विज्ञापन, और सोशल मीडिया पोस्ट्स – सब पर एक ही नाम चमकता है: कोचिंग सेंटर। लेकिन इस ...
नशीली दवाओं के के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस – 26 जून, 2025

नशीली दवाओं के के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस – 26 जून, 2025

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नशीली दवाओं के के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस - 26 जून, 2025नशीली दवाओं के खिलाफ महत्वाकांक्षी युद्ध का आह्वान- ललित गर्ग -नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस हर साल 26 जून को नशीली दवाओं मुक्त दुनिया को निर्मित करने के लक्ष्य को प्राप्त करने, कार्रवाई और सहयोग को मजबूत करने के लिए मनाया जाता है। इसका उद्देश्य गलत सूचनाओं का मुकाबला करना और नशीली दवाओं के बारे में तथ्यों को साझा करना है। साथ ही साक्ष्य आधारित रोकथाम, स्वास्थ्य जोखिमों और विश्व नशीली दवाओं की समस्या, उपचार और देखभाल से निपटने के लिए उपलब्ध समाधानों के बारे में जागरूकता पैदा करना है। अवैध ड्रग्स एवं तस्करी मानव के लिए बहुत बड़ी पीड़ा एवं संकट का स्रोत हैं। सबसे कमज़ोर लोग, खास तौर पर युवा लोग, इस संकट का खामियाजा भुगतते हैं। ड्रग्स का इस्तेमाल करने वाले और नशे की लत से जूझ रहे लोग अंधेरी दुनिया...
आज के परिवेश में श्रीहनुमानजी की भक्ति क्यों?

आज के परिवेश में श्रीहनुमानजी की भक्ति क्यों?

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आज के परिवेश में श्रीहनुमानजी की भक्ति क्यों? आज भारतवर्ष ही नहीं पूरा विश्व अर्थ अर्थात् भौतिकवाद की दौड़ में भाग रहा है। धर्म और काम नियन्त्रित नहीं है अत: अमर्यादित एषणाएँ पल्लवित, फलित एवं पुष्पित हो रही है। आबाल-वृहद, नर-नारी कामाचार अभक्ष्यभक्षण आदि दुष्ट प्रवृत्तियों का शिकार हो रहे हैं, व्यक्ति, समाज, देश एवं राष्ट्र के प्रति अपने पावन-पवित्र कर्तव्य से विमुख से दिखाई देते हैं। हम जहाँ कहीं थोड़ी बहुत धार्मिकता या आध्यात्मिकता के दर्शन करते हैं, देखा जाए तो वास्तव में वहाँ भी उनके आवरण में पाखण्ड, दम्भ दिखावा ही दिखाई देता है। इस विषम दु:खदायी-पीड़ादायी परिस्थिति में श्रीहनुमानजी की उपासना-भक्ति ही संजीवनी बूटी है।श्री हनुमानजी के चरित्र से बुद्धि, विवेक, शक्ति, अभिमान से मुक्ति एवं माता-पिता ही नहीं राष्ट्र की सेवा एवं समर्पण की भावना का उदय होगा। श्रीहनुमानजी के चरित्र से नई ...
भारत आध्यात्म एवं युवाओं के बल पर प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद में अतुलनीय वृद्धि कर सकता है

भारत आध्यात्म एवं युवाओं के बल पर प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद में अतुलनीय वृद्धि कर सकता है

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भारत आध्यात्म एवं युवाओं के बल पर प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद में अतुलनीय वृद्धि कर सकता है जापान की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ते हुए भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और संभवत आगामी लगभग दो वर्षों के अंदर जर्मनी की अर्थव्यवस्था से आगे निकलकर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की अपनी अपनी विशेषताएं हैं, जिसके  आधार पर यह अर्थव्यवस्थाएं विश्व में उच्च स्थान पर पहुंची हैं एवं इस स्थान पर बनी हुई हैं। प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद के मामले में आज भी कई विकसित देश भारत से आगे हैं। इन समस्त देशों के बीच चूंकि भारत की आबादी सबसे अधिक अर्थात 140 करोड़ नागरिकों से अधिक है, इसलिए भारत में प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद बहुत कम है। अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद का आकार 30.51 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर है और प्रति ब्यक्ति सकल घरेलू...
इजराईल – ईरान युद्ध में भारत निभा सकता है अहम भूमिका

इजराईल – ईरान युद्ध में भारत निभा सकता है अहम भूमिका

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इजराईल - ईरान युद्ध में भारत निभा सकता है अहम भूमिका रूस - यूक्रेन एवं इजराईल - हम्मास के बीच युद्ध अभी समाप्त भी नहीं हुआ है और तीसरे मोर्चे इजराईल - ईरान के बीच भी युद्ध प्रारम्भ हो गया है। हालांकि इस बीच भारत - पाकिस्तान के बीच भी युद्ध छिड़ गया था परंतु भारत की बड़े भाई की भूमिका के चलते इस युद्ध को शीघ्रता से समाप्त करने में सफलता मिल गई थी। दो देशों के बीच युद्ध में किसी एक देश का फायदा नहीं होकर बल्कि...
वैश्विक स्तर पर भारत के विरुद्ध पुनः गढ़े जा रहे झूठे विमर्श

वैश्विक स्तर पर भारत के विरुद्ध पुनः गढ़े जा रहे झूठे विमर्श

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वैश्विक स्तर पर भारत के विरुद्ध पुनः गढ़े जा रहे झूठे विमर्श वैश्विक स्तर पर आर्थिक जगत में भारत का उदय कुछ देशों को रास नहीं आ रहा है। विकसित देशों के बीच पूरे विश्व में भारत आज सबसे तेज गति से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है। जापान, ब्रिटेन, फ्रांन्स, इटली आदि देशों से आगे निकलते हुए भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और शीघ्र ही लगभग एक वर्ष के बाद जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए भारत के विश्व की तीसरी&n...
उपजाऊ भूमि को मरुस्थल होने से बचाना होगा

उपजाऊ भूमि को मरुस्थल होने से बचाना होगा

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उपजाऊ भूमि को मरुस्थल होने से बचाना होगा-ः ललित गर्ग:- मानव एवं जीव-जंतुओं का जीवन भूमि पर निर्भर है। फिर भी, पूरी दुनिया में प्रदूषण, भूमि का दोहन, जलवायु अराजकता और जैव विविधता विनाश का एक जहरीला मिश्रण स्वस्थ भूमि को रेगिस्तान में बदल रहा है और संपन्न पारिस्थितिकी तंत्र मृत क्षेत्रों में बदल रहा है। ‘हमारी भूमि’ नारे के तहत भूमि बहाली, मरुस्थलीकरण और सूखा निवारण आज की जलवायु समस्याओं का सटीक समाधान हो सकता है,  इसी को ध्यान में रखते हुए विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा निवारण दिवस 17 जून को मनाया जाता है। यह दिन मरुस्थलीकरण और सूखे से निपटने के लिए जागरूकता बढ़ाने और लोगों को एकजुट करने के लिए मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम है ‘भूमि के लिए एकजुट। हमारी विरासत। हमारा भविष्य’ है, संयुक्त राष्ट्र के अनुसार यह दिवस पर भूमि के महत्व और इसे भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने की आवश्यकता पर प्रका...
स्वैच्छिक रक्तदान की संस्कृति को बढ़ावा देकर उजाला बने

स्वैच्छिक रक्तदान की संस्कृति को बढ़ावा देकर उजाला बने

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स्वैच्छिक रक्तदान की संस्कृति को बढ़ावा देकर उजाला बने -ः ललित गर्ग:- किसी के जीवन में रंग भरने का, जीवन और मौत के बीच जूझ रहे लोगों को जीवन देने का और अधिक स्वास्थ्य संकट से घीरे व्यक्ति के जीवन में आशा की किरण बनने का सशक्त माध्यम है रक्तदान। दुनिया भर में अनगिनत लोगों को रक्त की अपेक्षा होती है, इसलिये रक्तदान-महादान है। रक्तदान के महत्व को उजागर करने के लिये विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा हर साल 14 जून को ‘विश्व रक्तदान दिवस’ मनाया जाता है। किसी व्यक्ति के जीवन में रक्तदान के महत्व को समझाने के साथ ही रक्तदान करने के लिये आम इंसान को प्रेरित एवं प्रोत्साहित करने के लिये यह दिवस मनाया जाता है। इंसान की सम्पत्ति का कोई मतलब नहीं अगर उसे बांटा और उपयोग में नहीं लाया जाए, चाहे वे शरीर का रक्त ही क्यों न हो। किसी व्यक्ति की रक्तअल्पता के कारण मृत्यु न हो, इस दृष्टि से रक्तदान एक महान् दान...
 सुविधा और दुविधा में फंसी यूपी के बेसिक शिक्षकों की तबादला नीति

 सुविधा और दुविधा में फंसी यूपी के बेसिक शिक्षकों की तबादला नीति

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 सुविधा और दुविधा में फंसी यूपी के बेसिक शिक्षकों की तबादला नीति संजय सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए सात साल बाद तबादले खोलकर षिक्षक समाज को बड़ी राहत प्रदान की है।  सरकार द्वारा अंतर-जनपदीय और जिला-स्तरीय तबादलों का रास्ता खुलने से शिक्षक खुश  तो हैं,लेकिन इसमें वह (शिक्षक) कुछ कमियों की बात करते हुए इन्हें दूर करने की  बात भी कह रहे हैं। तबादला प्रक्रिया शिक्षकों के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित थी, क्योंकि कई शिक्षक अपने गृह जनपद या परिवार के नजदीक स्थानांतरित होने की उम्मीद में वर्षों से इंतजार कर रहे थे। इस प्रक्रिया की शुरुआत जून 2025 में हुई, जब बेसिक शिक्षा परिषद ने शिक्षकों के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू की। लेकिन जैसे-जैसे यह प्रक्रिया आगे बढ़ी, शिक्षकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा, ...
संविधान की रक्षा में न्यायपालिका कहां कर रहा है चूक ?

संविधान की रक्षा में न्यायपालिका कहां कर रहा है चूक ?

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संविधान की रक्षा में न्यायपालिका कहां कर रहा है चूक ? संजय सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार विविधताओं से भरे भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में न्यायपालिका को संविधान का सबसे बड़ा रक्षक माना जाता है। यह न केवल कानून की व्याख्या करती है, बल्कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा भी करती है,लेकिन क्या ऐसा करते समय न्यायपालिका से कहीं न कहीं चूक हो जाती है ? या फिर जानबूझ कर अथवा अंजाने में कुछ न्यायविद किसी मुकदमे में फैसला सुनाते समय व्यक्तिगत हो जाते हैं,जिसको लेकर विरोधाभास भी हो जाता है। जबकि राष्ट्रहित और आतंकवादी घटनाओं से जुड़े मामलों में न्यायपालिका का हस्तक्षेप कई बार विवादों को जन्म देता है। नया कृषि कानून, वक्फ बोर्ड संशोधन कानून में सुप्रीम कोर्ट की अति सक्रियता इसकी बड़ी मिसाल हैं। यह हस्तक्षेप कब रक्षक की भूमिका निभाता है और कब खतरनाक साबित हो सकता है, इसको लेकर अक्सर विवाद बना रहता ह...