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सावधान: ऊपरवाला सब देख रहा है!

सावधान: ऊपरवाला सब देख रहा है!

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रजनीश कपूरदेश की एक नामी सीसीटीवी कंपनी ने अपने विज्ञापन में एक लाइन को प्रमुखता दी ‘ऊपरवाला सब देख रहा है’। इस कंपनी का उद्देश्य था कि उनके सीसीटीवी कैमरे की निगाह से कोई नहीं बच सकता। परंतु आज हम जिस संदर्भ में इस बात को कह रहे हैं वो सरकार द्वारा जनता पर नज़र रखने से संबंधित है। यह एक ऐसा विषय है जो आप सभी को सोचने पर मजबूर कर देगा। आपने देश के कई शहरों यातायात पुलिस द्वारा लगाए गये स्पीड कैमरे देखे होंगे। जो भी वाहन चालक स्पीड का क़ानून तोड़ता है। लाल बत्ती पार करता है। लाल बत्ती पर वाहन को स्टॉप लाइन के आगे खड़ा करता है। बिना हेलमेट के दुपहिया वाहन चलाता है या ऐसा कोई अन्य उल्लंघन करता है जो ट्रैफ़िक पुलिस के कैमरों में क़ैद हो जाता है तो उसके घर पर एक चालान पहुँच जाता है। ऐसे चालान आजकल ऑनलाइन भी चेक किए जा सकते हैंजहां पर फ़ोटो द्वारा ट्रैफ़िक नियम तोड़ने का प्रमाण भी दिखाई देत...
गेहूं भंडारण पर लगाम ?

गेहूं भंडारण पर लगाम ?

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कितनी अजीब बात है एक तरफ़ देश में गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है और दूसरी तरफ़ सरकार ने प्रचुर आपूर्ति के बीच उसकी स्टॉक लिमिट तय करने का निर्णय सुना दिया है । यह निर्णय इस बात का साफ़ संकेत है कि देश में खाद्य अर्थव्यवस्था भारी कुप्रबंधन की शिकार है। साफ़ समझ आ रहा है कि रबी का मार्केटिंग सीजन अभी समाप्त नहीं हुआ है और किसानों के पास अभी भी गेहूं का ऐसा भंडार मौजूद है जो बिका नहीं है। इस लिहाज से भी यह कदम न केवल गलत बल्कि किसान विरोधी ही कहा जाएगा । और ख़ास बात यह है कि यह निर्णय ऐसे समय आया है जब खाद्य मुद्रास्फीति 2.91 प्रतिशत के साथ 18 महीने के निचले स्तर पर है और सकल खुदरा मुद्रास्फीति 4.25 प्रतिशत के साथ 25 माह के निचले स्तर पर है। मोटे तौर पर खाद्य और ईंधन कीमतों में नरमी की बदौलत हुआ है।इसमें कोई संदेह नहीं है कि गेहूं के मामले में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति क...
प्रकृति से खिलवाड़ का परिणाम ही हैं प्राकृतिक आपदाएं !

प्रकृति से खिलवाड़ का परिणाम ही हैं प्राकृतिक आपदाएं !

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इन दिनों बिपरजॉय को लेकर देश में काफी चर्चा है। यह एक चक्रवात है। वैसे तो बिपरजॉय का अर्थ होता है 'बहुत खुशी'। लेकिन यह खुशी लेकर नहीं आया है और इन दिनों यह एक बहुत बड़ी मुसीबत बनकर भारत के कई समुद्री इलाकों पर मंडरा रहा है। विशेषकर बिपरजॉय का असर भारत के गुजरात, महाराष्ट्र समेत बहुत से समुद्री इलाकों में देखने को मिल रहा है। इन दिनों मुंबई के मरीन ड्राइव पर समुद्र में रह-रहकर ऊंची -ऊंची लहरें देखने को मिल रही है। यह सब इस चक्रवात के कारण हो रहा है गुजरात में तो चक्रवात को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। वास्तव में बिपरजॉय है क्या ? यहां यह हमें जानने और समझने की जरूरत है। दरअसल, कुछ समय पहले ही दक्षिण-पूर्व अरब सागर के ऊपर एक डीप-डिप्रेशन बना था, जो अब भयंकर तूफान में तब्दील हो गया है। इसी चक्रवाती तूफान को बिपरजॉय तूफान नाम दिया गया है और यह नाम बांग्लादेश द्वारा सुझाया गया है। मीडिया रिपो...
राहुल विदेशों में बढ़ती साख कोे बट्टा लगा रहे हैं

राहुल विदेशों में बढ़ती साख कोे बट्टा लगा रहे हैं

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 - ललित गर्ग -कांग्रेस नेता राहुल गांधी भारत में मोदी-विरोध में कुछ भी बोले, यह राजनीति का हिस्सा हो सकता है, लेकिन वे विदेश की धरती पर मोदी विरोध के चलते जिस तरह के गलत बयान देते रहे हैं, वह उनकी राजनीतिक अपरिपक्वता को ही दर्शाता है। आखिर कब राहुल एक जिम्मेदार एवं विवेकवान नेता बनेंगे? विदेश में कांग्रेस की यात्राओं के माध्यम से वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विश्वस्तरीय नेता की छवि को धुंधला कर स्वयं को उस स्तर का नेता साबित करने में जुटे हैं। जबकि मोदी की छवि एवं हस्ति, प्रसिद्धि एवं सर्वस्वीकार्यता विश्व के किसी भी नेता की तुलना में ज्यादा है। अन्य देशों की बात दूर, वे अभी भारत में भी जिम्मेदार नेेता नहीं बन पाये हैं। उनकी कार्यशैली एवं बयानबाजी में अभी भी बचकानापन एवं गैरजिम्मेदाराना भाव ही झलकता है। एक प्रांत में क्या जीत हासिल कर ली, अहंकार के शिखर पर चढ़ बैठे, निश्चित ही राहुल क...
2 जून हिन्दवी स्वराज्य स्थापना दिवस

2 जून हिन्दवी स्वराज्य स्थापना दिवस

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ज्येष्ठ शुक्लपक्ष त्रियोदशी (2 जून) हिन्दवी स्वराज्य स्थापना दिवस भारत में शोषण मुक्त समाज रचना का उद्देश्य था हिन्दवी स्वराज का --रमेश शर्मा छत्रपति शिवाजी महाराज पूरे भारत में स्वत्व स्वाभिमान और आत्मनिर्भर समाज की रचना करना चाहते थे । अपने इस संकल्प को आकार देने के लिये ही आक्रमणकारी सत्ताओं के बीच हिन्दवी स्वराज्य की नींव रखी गई थी ।वह ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष त्रियोदशी विक्रम संवत् 1731 (ईस्वी सन्1674) की तिथि थी जब दक्षिण भारत के रायगढ़ किले में हिन्दवी स्वराज्य यनि हिन्दू पदपादशाही की नींव रखी गई थी । इसी दिन शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ था । उस वर्ष यह तिथि 6 जून को थी । इस वर्ष यह तिथि 2 जून को पड़ रही है । इसलिये इस वर्ष वर्षगाँठ का यह आयोजन 2 जून से होगा । यह स्वाभिमान उत्सव कहीं एक सप्ताह सप्ताह तो कहीं पूरे पन्द्रह दिन चलता है । चूँकि शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक उत्सव...
<strong>संसद भवन के उद्घाटन पर मोदी-विरोध की राजनीति क्यों?</strong>

संसद भवन के उद्घाटन पर मोदी-विरोध की राजनीति क्यों?

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-ललित गर्ग-दुनिया में भारत एवं भारतीय लोकतंत्र का गौरव एवं सम्मान बढ़ रहा है, वहीं भारत में लोकतंत्र के इतिहास की एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक घटना का बहिष्कार करते हुए समूचा विपक्ष भारतीय लोकतांत्रिक उजालों पर कालिख पोतने का प्रयास कर रहा है। यह समय न केवल नये संसद भवन के उद्घाटन बल्कि लगातार दुनिया में भारत एवं उसके महानायक के सम्मान की घटनाओं को लेकर गर्व एवं गौरव करने का है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन ऐतिहासिक क्षणों को यादगार बनाते हुए विपक्ष विवेक एवं परिपक्व सोच का परिचय देने की बजाय संकीर्ण, बिखरावमूलक एवं विनाशकारी राजनीति का परिचय दे रहा है। अब यह लगभग तय हो चुका है कि लोकतंत्र का मंदिर कही जाने वाली संसद के नए भवन के उद्घाटन समारोह से विपक्ष के 19 दल गायब रहेेंगे। इन विपक्षी दलों ने बाकायदा घोषणा कर दी कि वे रविवार को होने वाले इस समारोह का बहिष्कार करेंगे। कारण यह है कि संसद ...
सेंगोल क्या है और इसकी इतिहास कितनी पुरानी है ? जिसे नए संसद भवन में रखा जाएगा.

सेंगोल क्या है और इसकी इतिहास कितनी पुरानी है ? जिसे नए संसद भवन में रखा जाएगा.

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सेंगोल का 'इतिहास' काफी पुराना है,और यह चोला साम्राज्य से जुड़ा हुआ है. इसकी जरूरी बात यह है कि यह जिसे प्राप्त होता है, उससे "राज्य की प्रजा" निष्पक्ष और न्यायपूर्ण शासन की आशा करते है. "सेंगोल राजदंड" औपचारिक अवसरों पर चोल सम्राटों द्वारा ग्रहण किया जाता था और इसका इस्तेमाल उनके "अधिकार" को दर्शाने के लिए किया जाता था ! बता दूं कि सेंगोल शब्द की "उत्पत्ति" संस्कृत से "संकु" शब्द से हुई है जिसका अर्थ "शंख" होता है ! सनातन धर्म में शंख को काफी पवित्र माना जाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई को नए संसद भवन को देश को समर्पित करेंगे. हालांकि, नाम मात्र 19 विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया है और महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी से नए संसद भवन का उद्घाटन कराने की मांग किया है. यह विपक्षी पार्टियों का एक 'Propaganda' है और उनका टार्गेट नरेंद्र मोदी है !! चलिए अब पोस्ट की 'विषयवस्त...
शोर प्रदूषण आज के समय की एक बहुत बड़ी समस्या है।

शोर प्रदूषण आज के समय की एक बहुत बड़ी समस्या है।

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शोर प्रदूषण आज के समय की एक बहुत बड़ी समस्या है। और आजकल हमारे देश के बड़े शहरों में बहुत अधिक शोर प्रदूषण हो रहा है। यहां यह जानना जरूरी है कि आखिर शोर प्रदूषण है क्या ? और इसके दुष्प्रभाव क्या हैं ? वास्तव में, शोर प्रदूषण अनुपयोगी ध्वनि होती है जिससे मानव तो मानव यहां तक कि जीव-जंतुओं तक को भी परेशानी होती है। वास्तव में,जब शोर की तीव्रता पर्यावरण में अत्यधिक हो जाती है तब उसे ध्वनि प्रदूषण कहते हैं। आज हमारे देश की लगातार जनसंख्या बढ़ रही है और जनसंख्या वृद्धि के साथ ही यातायात के साधनों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। विकास के साथ ही विभिन्न औधोगिक कल-कारखानों में भी अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी हुई है और यही कारण भी है कि शोर(ध्वनि) प्रदूषण में भी इजाफा हुआ है। ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌इसके अलावा बिजली कड़कना, बिजली गिरना आदि जैसी कई प्राकृतिक घटनाएं, जो शोर उत्पन्न करतीं हैं, भी म...
आम के बहाने पसमांदा मुसलमानों के साथ योगी

आम के बहाने पसमांदा मुसलमानों के साथ योगी

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आर.के. सिन्हा मिर्जा ग़ालिब मीठे आम के लिए जान देते थे। वे अपने दोस्तों-यारों के साथ आम खाना पसंद करते थे। उनकी आम की पार्टियाँ मशहूर हैं I वे वर्ष 1827 में दिल्ली से कोलकाता गए थे। वे दिल्ली से कोलकाता जाते वक्त कानपुर, लखनऊ, बाँदा, इलाहाबाद होते हुए बनारस पहुँचे। वे बनारस में छह महीने ठहरे थे। उन्होंने अपने सफर के दौरान उत्तर प्रदेश के मशहूर दशहरी या लंगड़ा आम का जमकर स्वाद स्वाद चखा । आम की अलग-अलग प्रजातियां सारे देश में मिलेंगी पर उत्तर प्रदेश में मिलने वाले मिश्री जैसे रसीले आमों की बात ही अलग है। अजीब सा संयोग है कि राज्य में आम की खेती और व्यापार में मुसलमानों की अच्छी-खासी भूमिका है। आपको सारे प्रदेश में आम की खेती करते हुए ज्यादातर मुसलमान ही मिलेंगे। कुछ समय पहले राज्य के कुछ इलाकों में बेमौसमी बारिश तथा ओला वृष्टि से आम किसानों के स...
किरण रिजूजू को हटाया गया या उनका टास्क पूरा हो गया..??

किरण रिजूजू को हटाया गया या उनका टास्क पूरा हो गया..??

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पहले तो समझिए कि किरण रिजूजू बहुत जूनियर मंत्री थे जिन्हें एकाएक कानून मंत्रालय जैसा बड़ा पोर्टफोलियो दिया गया था। जाहिर है जिसने दिया है उसने कुछ टास्क भी दिया था। अब किरण रिजूजू क्या कर रहे थे?अपने टास्क अनुसार लगातार न्यायपालिका पर हमलावर थे।उन्होंने हर उस तरह न्यायपालिका पर हमला किया जो अभी तक आमजन के अंदर था लेकिन कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट के डर से आमजन उसे बोलने से डरता था। उन्होंने अपने टास्क के तहत आमजन को वो ताकत दी कि करो न्यापालिका को एक्सपोज, कंटेम्प्ट होगा तो पहले मेरा होगा। इसके बाद वो खुद भी कोर्ट पर हमलावर हुए।उन्होंने भाई भतीजावाद पर हमला किया कि ये खुद से खुद ही जज चुन लेते हैं।उन्होंने ये भी कहा कि इनके कुछ जज तो रिटायर होने के बाद एन्टी इंडिया फोर्स जॉइन कर लेते हैं।उन्होंने ये भी कहा कि ये 4-5 जज बैठकर भारत का फैसला नही कर सकते हैं।उन्होंने ये भी कहा कि ये जज तो अपन...