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India & Singapore agree to promote collaboration in S&T

India & Singapore agree to promote collaboration in S&T

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India & Singapore agree to promote collaboration in S&T India and Singapore have agreed to promote cooperation in the areas of science, technology, and innovation. The pact will follow a demand-driven approach and facilitate joint projects involving institutions and industries from the two countries. The Memorandum of understanding signed by Dr. S Chandrasekhar, Secretary, Department of Science & Technology, Government of India, and Dr. Lee Chuan Teck, Permanent Secretary, Ministry of Trade & Industry, Government of Singapore, also provides for greater mobility of scientists and high-level experts, sharing of experiences on the national research, development, and innovation policies and programmes, and exchange of scientific and technological information. Besides, it s...
क्रांतिकारी व आमूलचूल बदलाव लाने वाले हैं विधानसभा चुनावों के परिणाम – अनुज अग्रवाल

क्रांतिकारी व आमूलचूल बदलाव लाने वाले हैं विधानसभा चुनावों के परिणाम – अनुज अग्रवाल

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छद्म हिंदुत्ववादियों, पत्तलकारों, कुबुद्धिजीवियों और अल्पसंख्यकवाद व जाति की राजनीति करने वाले दलों के प्रपंच और षड्यंत्रों को धता बताकर अंतत पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों में सनातन संस्कृति, राष्ट्रवाद, हिंदुत्व , डबल इंजन की सरकार, लाभार्थी जाति के समर्थन और विकास के एजेंडे पर काम कर रही भाजपा चार राज्यों में फिर से अपनी सरकार बनाने में सफल हो गयी है तो दूसरी ओर सत्तारूढ़ कांग्रेस की अंतर्कलह , कुशासन , अकाली दल के सिरमौर बादल परिवार के भ्रष्टाचार से तंग, भाजपा के देर से सक्रिय होने के कारण व किसान आंदोलन और खालिस्तान आंदोलन व मुफ्त योजनाओं के लालच में पंजाब की जनता नए चेहरों वाली आम आदमी पार्टी को भारी बहुमत से सरकार की डोर थमा बैठी। सन 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए लिटमस टेस्ट माने जाने वाले इन चुनावों के परिणामों ने कोरोना संकट के कारण अतिशय दबाव व चुनौती झेल रही केंद्र में...
भारतीय मानक ब्यूरो ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-आईआईटी रुड़की के साथ ‘बीआईएस मानकीकरण चेयर प्रोफेसर’ की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

भारतीय मानक ब्यूरो ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-आईआईटी रुड़की के साथ ‘बीआईएस मानकीकरण चेयर प्रोफेसर’ की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

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भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-आईआईटी रुड़की में 'बीआईएस मानकीकरण चेयर प्रोफेसर' की स्थापना के लिए 10 मार्च 2022 को आईआईटी रुड़की (आईआईटीआर) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। मानकीकरण और अनुपालन मूल्यांकन पर गतिविधियों के लिए संस्थान में बीआईएस द्वारा स्थापित यह पहली मानकीकरण चेयर होगी। समझौता ज्ञापन देश में मानकीकरण और अनुपालन मूल्यांकन के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास, शिक्षण और प्रशिक्षण की सुविधा प्रदान करेगा, जिसमें सिविल, विद्युत, यांत्रिक, रसायन, भूकंप इंजीनियरिंग, जल संसाधनों के विकास और प्रबंधन और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं, बुनियादी ढांचा विकास, चिकित्सा जैव प्रौद्योगिकी और नैनो प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, जैव सामग्री, आदि के क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। यह छात्रों को इस बारे में संवेदनशील बनाने में भी मदद करेगा कि कैस...
रूस.यूक्रेन युद्ध के भारत पर परिणाम

रूस.यूक्रेन युद्ध के भारत पर परिणाम

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रूस.यूक्रेन युद्ध के भारत पर परिणाम विनीत नारायण पूरी दुनिया यूक्रेन रूस के युद्ध को लेकर बेचैन है। भारत की बड़ी चिंता उन विद्यार्थियों को लेकर है जो यूक्रेन में अभी फँसे हुए हैं। जो विद्यार्थी जोखिम उठा करए तकलीफ़ सहकरए भूखे प्यासे रह कर यूक्रेन की सीमाओं को पार कर पा रहे हैंए उन्हें ही भारत लाने का काम भारत सरकार कर रही है। पर जो युद्धग्रस्त यूक्रेन के शहरों में फँसे हैंए ख़ासकर वो जो सीमा से कई सौ किलोमीटर दूर हैंए उनकी हालात बहुत नाज़ुक है। वे बार.बार सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि उन्हें जल्दी से जल्दी वहाँ से सुरक्षित निकाला जाए अन्यथा वे ज़िंदा नहीं बचेंगे। चूँकि इस युद्ध में भारत रूस के साथ खड़ा हैए इसलिए यूक्रेन की सेना और नागरिक भारतीयों से नाराज़ है और मदद करना तो दूर छात्रों को यातनाएँ दे रहे हैं। ऐसा उन विद्यार्थियों के वायरल होते विडीयो में देखा जा रहा है। इसके साथ ही इस युद...
सामाजिक सरोकार और लोकतांत्रिक मूल्य

सामाजिक सरोकार और लोकतांत्रिक मूल्य

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सामाजिक सरोकार और लोकतांत्रिक मूल्य भारतीय राजनीति का महत्वपूर्ण पहलू स्वतंत्रता आंदोलन के महान आदर्शवाद से उस स्थिति में परिवर्तन है जिसमें वह वर्तमान में खुद को पाता है। प्रत्येक व्यक्ति समाज के साथ अपने व्यवहार में स्वार्थ से शासित होता है। लेकिन जब इस स्वार्थ को बड़े पैमाने पर देश के हितों से ऊपर रखा जाता है, तो यह लोकतंत्र के अस्तित्व और देश की एकता और अखंडता के लिए एक संभावित खतरा बन जाता है। इसके अलावा, यदि जाति, समुदाय, धर्म, भाषा और क्षेत्र के आधार पर सांप्रदायिक वैमनस्य और कृत्रिम अवरोध पैदा किए जाते हैं और अगर संवैधानिक रूपों को प्राथमिकता देने के लिए आंदोलन का इस्तेमाल किया जाता है, तो ये सार्वजनिक जीवन में अनुशासनहीनता का कारण बनते हैं। जबकि संवैधानिक प्रावधान स्पष्ट रूप से नागरिकों को प्रोत्साहित करते हैं और उन्हें खुद को शालीनता से आचरण करने के लिए प्रेरित करते हैं, यह दु...
संसदीय लोकतंत्र में “प्रश्न पूछने” का महत्व

संसदीय लोकतंत्र में “प्रश्न पूछने” का महत्व

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संसदीय लोकतंत्र में "प्रश्न पूछने" का महत्व संसदीय लोकतंत्र के बारे में सबसे महत्वपूर्ण धारणा यह है कि संसद सरकार और लोगों के बीच एक कड़ी है। सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है और यह जवाबदेही जनता द्वारा संसद में अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से सुरक्षित की जाती है। लोकतंत्र के स्वरूप की परवाह किए बिना जवाबदेही सरकार का एक महत्वपूर्ण सहायक है। हमारे संविधान में विभिन्न तरीकों से जिम्मेदारी और जवाबदेही सुनिश्चित की गई है। ऐसी संस्थाएँ स्थापित की गई हैं जो सरकार के कामकाज पर नज़र रखती हैं और उसकी निगरानी करती हैं। यह देखने के लिए कि क्या सरकार ठीक से काम कर रही है, सवाल पूछने के अलावा कोई अन्य मजबूत रास्ता नहीं है। संसदीय लोकतंत्र की सफलता के लिए सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता संसद में प्रश्न पूछने की स्वतंत्रता को बनाए रखना है। यदि उस स्वतंत्रता को सीमित कर दिया जाए तो प्रश्न का महत्व कम हो ...
नारी’ की पूजा तो फिर अत्याचार क्यों?

नारी’ की पूजा तो फिर अत्याचार क्यों?

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‘नारी’ की पूजा तो फिर अत्याचार क्यों? -ललित गर्ग - नारी के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन तथा मातृशक्ति की अभिवंदना का एक स्वर्णिम अवसर है विश्व नारी दिवस, यह नारी की महिमा को उजागर करने वाला ऐतिहासिक दिन है। आखिर नारी को ही ‘माँ’ का महत्त्वपूर्ण पद और संबोधन मिला। कारण की मीमांसा करते हुए अनुभवविदों ने बताया-हमारी भारतीय परंपरा में भारतमाता, राजमाता, गौमाता की तरह धरती को भी माता कहा जाता है। वह इसलिए कि धरती पैदा करती है। वह निर्मात्री है, सृष्टा है, संरक्षण देती है, पोषण करती है, बीज को विस्तार देती है, अनाम उत्सर्ग करती है, समर्पण का सितार बजाती है, आश्रम देती है, ममता के आँचल में सबको समेट लेती है और सब कुछ चुपचाप सह लेती है। इसीलिए उसे ‘माता’ का गौरवपूर्ण पद मिला। माँ की भूमिका यही है।‘मातृदेवो भवः’ यह सूक्त भारतीय संस्कृति का परिचय-पत्र है।  ऋषि-महर्षियों की तपः पूत स...
सेक्स ऑब्जेक्ट’ जमाने में महिला सशक्तिकरण

सेक्स ऑब्जेक्ट’ जमाने में महिला सशक्तिकरण

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सेक्स ऑब्जेक्ट' जमाने में महिला सशक्तिकरण (सोशल मीडिया पर पाया गया  है कि लड़कियों को लड़कों की तुलना में अधिक बार यौन रूप से चित्रित किया जाता है। सोशल मीडिया ने "किशोर लड़कियों के लिए कुछ यौन कथाओं के अनुरूप होने के लिए सदियों पुराने दबावों को बढ़ाया है। यह दर्शाता है कि महिलाओं के साथ एक ऐसी वस्तु के रूप में व्यवहार किया जाता है जिसकी खुद की कोई पहचान नहीं होती है। इसमें और अन्य विज्ञापनों में महिलाओं का चित्रण वास्तव में सामान्य रूप से महिलाओं का अपमान है जो महिलाओं की वास्तविक स्थिति और गरिमा को नष्ट कर रहे हैं।) --प्रियंका 'सौरभ' अभी कुछ समय पहले, सोशल मीडिया पर 'बोइस लॉकर रूम' की घटना हुई थी, जिसमें एक विशेष समूह से लीक हुई चैट के माध्यम से कम उम्र की लड़कियों की अश्लील तस्वीरें प्रसारित की गई थीं। यह समय है कि हम रुकें और स्वीकार करें कि 'बोइस लॉकर रूम' बलात्कार की संस्कृति को स...
अब अपराधी के मानस मूल्यांकन की सार्थक पहल

अब अपराधी के मानस मूल्यांकन की सार्थक पहल

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अब अपराधी के मानस मूल्यांकन की सार्थक पहल- ललित गर्ग-दुनिया के बहुत सारे देशों में फांसी की सजा का प्रावधान समाप्त किया जा चुका है और भारत में भी फांसी की सजा को समाप्त करने की मांग लगातार उठ रही है। प्रश्न है कि क्या मौत की सजा जैसे सख्त कानूनों के प्रावधान करने मात्र से अपराधों एवं अत्याचारों पर नियंत्रण पाया जा सकता है? अपराधों को कठोर कानूनों के जरिये रोकने से ज्यादा जरूरी है कि समाज मंे ऐसी जागृति लाई जाये कि लोगों का मन बदले, अपराध की मानसिकता समाप्त हो। अपराधी को समाप्त करने की बजाय अपराध के कारणों को समाप्त किया जाना चाहिए। इसी के मद्देनजर अब सर्वाेच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि मौत की सजा पाए व्यक्तियों का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन भी अवश्य किया जाए। इसके लिए चिकित्सा संस्थानों के सुयोग्य मनोवैज्ञानिकों और मनोचिकित्सकों की टीम गठित की जाए। सर्वाेच्च न्यायालय के इस आदेश से मौत की सज...
आत्मनिर्भरता का प्रतीक है वैज्ञानिक कुशलता

आत्मनिर्भरता का प्रतीक है वैज्ञानिक कुशलता

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आत्मनिर्भरता का प्रतीक है वैज्ञानिक कुशलता या वैज्ञानिक कुशलता का परिचायक है एकीकृत दृष्टिकोण डॉ. शंकर सुवन सिंह वास्तविक ज्ञान ही विज्ञान है। प्राकृतिक विज्ञान प्रकृति और भौतिक दुनिया का व्यवस्थित ज्ञान होता है,या फ़िर इसका अध्ययन करने वाली इसकी कोई शाखा। असल में विज्ञान शब्द का उपयोग लगभग हमेशा प्राकृतिक विज्ञानों के लिये ही किया जाता है। इसकी तीन मुख्य शाखाएँ हैं : भौतिकी, रसायन शास्त्र और जीव विज्ञान। रसायन का वास्तविक ज्ञान, रसायन विज्ञान है। भौतिकी का वास्तविक ज्ञान, भौतिक विज्ञान है। जीव का वास्तविक ज्ञान, जीव विज्ञान है। कृषि का वास्तविक ज्ञान, कृषि विज्ञान है। खाद्य का वास्तविक ज्ञान, खाद्य विज्ञान है। दुग्ध का वास्तविक ज्ञान दुग्ध विज्ञान है। आदि ऐसे अनेक क्षेत्रों में विज्ञान है। रसायन, भौतिकी, जीव-जंतु, कृषि, खाद्य, दुग्ध, आदि अनेक क्षेत्रों के वास्तविक ज्ञान से राष्ट्रहि...